संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी इमिग्रेशन प्रक्रियाओं को और अधिक कड़ा कर दिया है। नए बदलावों के तहत अब इमिग्रेशन अधिकारियों को यह अधिकार मिल गया है कि वे बिना अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग किए ही वीज़ा, ग्रीन कार्ड, नागरिकता और अन्य इमिग्रेशन लाभों के लिए आए अधूरे आवेदनों को सीधे खारिज कर दें। यह नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है। इसका सीधा असर अमेरिका में पढ़ाई, काम या बसने का सपना देखने वाले हजारों भारतीय आवेदकों पर पड़ने की संभावना है।
यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने स्पष्ट किया है कि हर आवेदक को फाइलिंग के समय ही अपनी योग्यता साबित करनी होगी। संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि किसी आवेदन में सभी जरूरी शुरुआती साक्ष्य मौजूद नहीं हैं या वह योग्यता साबित करने में विफल रहता है, तो अधिकारी अब ‘रिक्वेस्ट फॉर एविडेंस’ (RFE) या ‘नोटिस ऑफ इंटेंट टू डिनाई’ (NOID) जारी किए बिना ही उस अनुरोध को ठुकरा सकते हैं।
इस मामले पर USCIS का कहना है कि यह जिम्मेदारी पूरी तरह से आवेदनकर्ता की है कि वह फॉर्म जमा करते वक्त अपनी पात्रता साबित करे। साथ ही, फैसले की प्रक्रिया पूरी होने तक भी उसे अपनी योग्यता बनाए रखनी होगी। एजेंसी ने यह भी बताया कि उनके एप्लीकेशन फॉर्म और उससे जुड़े निर्देशों में हर इमिग्रेशन लाभ के लिए जरूरी दस्तावेजों का जिक्र पहले से ही होता है। इससे आवेदकों को फाइलिंग के समय ही पूरा अनुरोध सबमिट करने में आसानी होती है।
USCIS के अनुसार, यह नई नीति डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के पुराने नियामक अधिकारों के साथ उनकी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से जोड़ती है। इससे इमिग्रेशन सिस्टम की विश्वसनीयता भी मजबूत होती है। इसके अलावा, इस कड़े कदम से उन आवेदकों के लिए आधारहीन या बेकार के आवेदन दाखिल करना मुश्किल हो जाएगा, जो बिना पूरी तैयारी के ऐसा करते हैं।
यह नया निर्देश दरअसल बाइडन प्रशासन के दौरान अपनाई गई एक पुरानी नीति को पलटता है। उस समय इमिग्रेशन अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाता था कि वे किसी भी एप्लीकेशन को खारिज करने से पहले अतिरिक्त सबूत (RFE) की मांग करें। भले ही वह आवेदन अधूरा ही क्यों न हो या उसमें सबमिशन के समय जरूरी दस्तावेजों की कमी ही क्यों न हो।
एजेंसी का मानना है कि पिछली नीति की वजह से अधूरे या त्रुटिपूर्ण आवेदनों के कारण अन्य पेंडिंग मामलों की प्रोसेसिंग धीमी हो जाती थी। USCIS ने यह भी बताया कि पुरानी व्यवस्था ने कुछ लोगों को सिर्फ ‘प्लेसहोल्डर’ (दिखावे के) आवेदन दाखिल करने का मौका दिया। इसका मुख्य उद्देश्य अपने मूल अनुरोध पर फैसले का इंतजार करते हुए रोजगार प्राधिकरण जैसे इमिग्रेशन लाभ हासिल करना होता था।
अब USCIS ने अधिकारियों को वह विशेषाधिकार लौटा दिया है जिससे वे बिना RFE या NOID जारी किए ही अनुचित आवेदनों को तुरंत निरस्त कर सकें। हालांकि, अधिकारियों के पास अभी भी यह अधिकार सुरक्षित रहेगा कि यदि उन्हें लगता है कि निर्णय लेने से पहले कुछ अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता है, तो वे RFE जारी कर सकते हैं।
इस अपडेटेड पॉलिसी के तहत, इमिग्रेशन अधिकारियों के पास कई प्रमुख अधिकार होंगे। वे फाइलिंग के समय योग्यता साबित न कर पाने वाले आवेदनों को सीधे अस्वीकार कर सकते हैं। इसके साथ ही, बिना जरूरी शुरुआती सहायक साक्ष्यों के जमा किए गए अनुरोधों को भी खारिज करने का प्रावधान है। हालांकि, जिस मामले में उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज उचित लगेंगे, वहां वे अपनी समझ से RFE जारी करने का निर्णय ले सकते हैं।
एजेंसी का दावा है कि इन बदलावों से संसाधनों का अधिक कुशलता से उपयोग हो सकेगा। इससे मामलों की प्रोसेसिंग में भी तेजी आएगी और उन आधारहीन आवेदनों की संख्या कम होगी जो मौजूदा बैकलॉग को और बढ़ाते हैं।
यह नई नीति 5 अगस्त 2026 या उसके बाद दाखिल किए गए और लंबित सभी इमिग्रेशन लाभ अनुरोधों पर तुरंत लागू हो गई है। यह नियम केवल उन्हीं मामलों पर लागू नहीं होगा जहां मौजूदा नियम या USCIS पॉलिसी कोई अलग व्यवस्था देते हों।
यह बड़ा कदम अमेरिकी इमिग्रेशन प्रक्रियाओं में उन ताज़ा बदलावों में से एक है जिनका उद्देश्य लाभ देने वाले मानकों को कड़ा करना है। रोजगार आधारित वीज़ा, परिवार-प्रायोजित ग्रीन कार्ड, स्टेटस में विस्तार या बदलाव, नागरिकता और अन्य इमिग्रेशन लाभों की चाह रखने वाले लोगों पर अब एक भारी दबाव होगा। उन्हें अब हर हाल में यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके आवेदन फाइलिंग के समय पूरी तरह से दस्तावेजों से लैस हों। ऐसा न होने पर अब अधूरी एप्लीकेशन को सुधारने का मौका शायद ही मिले और उसे सीधे खारिज कर दिया जाएगा।
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