अहमदाबाद: गुजरात यूनिवर्सिटी (GU) के एक्सटर्नल छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी ऑनलाइन लीक होने का एक गंभीर मामला सामने आया है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हॉल टिकटों से छात्रों की तस्वीरें, उनके हस्ताक्षर और परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विवरण कथित तौर पर इकट्ठा करके सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए गए हैं। इस घटना ने छात्रों के डेटा के गलत इस्तेमाल को लेकर गहरी चिंताएं पैदा कर दी हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत हरकत में आया। अधिकारियों को जैसे ही इस डेटा लीक की सूचना मिली, उन्होंने तत्काल प्रभाव से उस सामग्री को इंटरनेट से हटा दिया। इसके साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए छात्रों के दस्तावेज डाउनलोड करने की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने पर काम शुरू कर दिया गया है।
आपको बता दें कि गुजरात यूनिवर्सिटी में रेगुलर और एक्सटर्नल छात्रों के लिए हॉल टिकट वितरण की अलग-अलग प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। रेगुलर छात्रों के हॉल टिकट संबद्ध कॉलेजों द्वारा एक अधिकृत लॉगिन के जरिए डाउनलोड और प्रिंट किए जाते हैं। इसके बाद ही वे छात्रों को बांटे जाते हैं। वहीं, एक्सटर्नल उम्मीदवारों को अब तक सीधे विश्वविद्यालय की वेबसाइट से अपने हॉल टिकट डाउनलोड करने की खुली छूट दी गई थी।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, यह ‘ओपन-एक्सेस’ व्यवस्था केवल छात्रों की सुविधा के लिए शुरू की गई थी। दरअसल, कई एक्सटर्नल छात्र नौकरीपेशा होते हैं, अपना व्यवसाय चलाते हैं या उनके लिए व्यक्तिगत रूप से विश्वविद्यालय आकर हॉल टिकट लेना काफी मुश्किल होता है। इसी सहूलियत का कुछ लोगों ने अनुचित लाभ उठाया और सुरक्षा में सेंध लगा दी।
यह पूरी व्यवस्था तब सवालों के घेरे में आ गई जब यह खबर फैली कि कुछ लोगों ने वेबसाइट पर अपलोड की गई फाइलों को थोक में इकट्ठा कर लिया है। उन्होंने छात्रों की तस्वीरों, हस्ताक्षरों और अन्य संवेदनशील जानकारियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर करना शुरू कर दिया। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस लीक से कितने छात्र प्रभावित हुए हैं, यह जानकारी कितनी देर तक इंटरनेट पर उपलब्ध रही या इस डेटा का किसी तरह से दुरुपयोग हुआ है या नहीं।
इस बड़ी चूक के बाद अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बिना रोक-टोक हॉल टिकट डाउनलोड करने की इस मौजूदा व्यवस्था को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा। अगले शैक्षणिक वर्ष से विश्वविद्यालय एक नई और पूरी तरह से सुरक्षित प्रणाली लागू करने की योजना बना रहा है। इस नए सिस्टम के तहत एक्सटर्नल उम्मीदवार उचित प्रमाणीकरण (ऑथेंटिकेशन) प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही अपना हॉल टिकट प्राप्त कर सकेंगे।
इस पूरी घटना ने विश्वविद्यालय स्तर पर साइबर सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने की सख्त जरूरत को उजागर कर दिया है। गुजरात यूनिवर्सिटी हर साल लाखों छात्रों के रिकॉर्ड और परीक्षा संबंधी डेटा को संभालती है, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की गोपनीयता सुनिश्चित करना अब प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।
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