ट्रंप प्रशासन एक ऐसे नए प्रस्ताव पर विचार कर रहा है जो अमेरिका में रहने वाले हजारों H-4 वीजा धारकों के कानूनी रूप से काम करने के अधिकार को समाप्त कर सकता है। अगर यह प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो पिछले एक दशक से अधिक समय से चली आ रही वह नीति पलट जाएगी जिसने पात्र H-4 जीवनसाथियों को वहां नौकरी करने की अनुमति दी थी। इस कदम का सबसे सीधा और गंभीर असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा, क्योंकि इस परमिट को हासिल करने वालों में बहुतायत भारतीयों की ही है।
आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति और भी स्पष्ट हो जाती है। साल 2014 से लेकर 2017 के बीच H-4 रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज (ईएडी) के जितने भी आवेदन मंजूर हुए, उनमें से 93 प्रतिशत भारतीय नागरिक थे। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि इन स्वीकृत भारतीय आवेदनों में से 94 फीसदी महिलाएं थीं।
इस नई योजना को सूचना एवं नियामक मामलों के कार्यालय के तहत आधिकारिक वेबसाइट ‘Reginfo.gov’ पर सूचीबद्ध किया गया है। इसे “रोजगार प्राधिकरण के लिए पात्र गैर-नागरिकों के वर्गों से H-4 आश्रित जीवनसाथियों को हटाना” शीर्षक दिया गया है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) ने इसे अपने दीर्घकालिक नियामक एजेंडे में शामिल कर लिया है, हालांकि अभी तक इसके जारी होने की कोई निश्चित तारीख तय नहीं की गई है।
डीएचएस के नोटिस में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि विभाग अपने नियमों में बदलाव का प्रस्ताव कर रहा है। इसके तहत H-1B गैर-आप्रवासी श्रमिकों के कुछ H-4 आश्रित जीवनसाथियों को (c)(26) श्रेणी के तहत रोजगार के लिए आवेदन करने वाले पात्र विदेशी नागरिकों के वर्ग से बाहर कर दिया जाएगा।
इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य 2015 में लागू किए गए अंतिम नियम ‘कुछ H-4 आश्रित जीवनसाथियों के लिए रोजगार प्राधिकरण’ को रद्द करना है। डीएचएस की योजना अपनी उस पुरानी और लंबे समय से चली आ रही नीति को बहाल करने की है जिसमें H-4 आश्रितों को काम करने की अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं था।
राहत की बात फिलहाल यह है कि यह अभी केवल एक प्रस्ताव है और इसे अंतिम नियम का रूप नहीं दिया गया है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि H-4 कार्य प्राधिकरण तत्काल प्रभाव से समाप्त हो गया है। इसे लागू करने से पहले, डीएचएस को फेडरल रजिस्टर में प्रस्तावित नियम बनाने का एक औपचारिक नोटिस प्रकाशित करना होगा। इसके बाद जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे और फिर अंतिम नियम जारी किया जाएगा। तब तक वैध ईएडी वाले H-4 वीजा धारक मौजूदा नियमों के तहत अपना काम जारी रख सकते हैं।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब H-4 ईएडी योजना को खत्म करने की कोशिश की गई हो। इससे पहले 2017 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भी डीएचएस ने कुछ H-4 जीवनसाथियों के लिए रोजगार प्राधिकरण को हटाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, वह योजना कभी अंतिम रूप नहीं ले सकी और आखिरकार 2021 में उसे वापस ले लिया गया था।
अमेरिकी प्रशासन द्वारा H-1B वीजा को लक्षित करने वाला यह कोई इकलौता कदम नहीं है। डीएचएस ने नई H-1B नियुक्तियों पर 103,265 डॉलर का भारी-भरकम शुल्क लगाने का भी प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही, व्हाइट हाउस उस 60 दिनों की मोहलत को भी खत्म करना चाहता है जो फिलहाल H-1B कर्मचारियों को नौकरी जाने की स्थिति में नया नियोक्ता खोजने के लिए दी जाती है।
मूल रूप से H-4 कोई कार्य वीजा नहीं है। यह केवल H-1B धारक के जीवनसाथी या बच्चों को उनके साथ अमेरिका में रहने की अनुमति देने के लिए जारी किया जाता है। H-4 धारक को कानूनी तौर पर नौकरी करने के लिए एक अलग वर्क परमिट यानी ईएडी की आवश्यकता होती है। यह सुविधा भी केवल उन्हीं जीवनसाथियों को मिलती है जिनके H-1B पार्टनर पहले से ही ग्रीन कार्ड प्राप्त करने की प्रक्रिया में शामिल हैं। ईएडी के बिना H-4 धारक अमेरिका में काम नहीं कर सकते, हालांकि उन्हें वहां रहने, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने और बैंक खाते खोलने की पूरी छूट होती है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा खामियाजा भारतीय H-1B परिवारों को भुगतना पड़ सकता है। यूएससीआईएस के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024 में स्वीकृत H-1B याचिकाओं में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी लगभग 71 प्रतिशत थी। यही कारण है कि नए नियमों की सुगबुगाहट ने अमेरिका में काम कर रहे हजारों भारतीय पेशेवरों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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