अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के आखिरी दो साल बचे हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है।
एक हालिया सर्वेक्षण में सामने आया है कि करीब 60 प्रतिशत अमेरिकी मतदाता राष्ट्रपति के कामकाज से बेहद नाखुश हैं। वहीं, लगभग 70 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि कांग्रेस उनके अधिकारों पर प्रभावी तरीके से लगाम लगाए। इसके अलावा, दस में से छह मतदाताओं का स्पष्ट तौर पर मानना है कि ट्रंप देश की भलाई से ज्यादा अपने निजी हितों को तरजीह देते हैं।
युवा मतदाताओं के रुझान में भी रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ भारी बदलाव देखा गया है। साल 2024 के चुनाव में 30 वर्ष से कम उम्र के युवाओं का समर्थन दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच लगभग बराबर बंटा हुआ था। हालांकि, इस बार 70 प्रतिशत युवा मतदाताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में जबरदस्त मतदान किया है।
वैश्विक नेताओं ने भी इन नतीजों पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने इन परिणामों का स्वागत करते हुए इसे वैश्विक संबंधों के लिए एक ‘नए युग’ की शुरुआत बताया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि डेमोक्रेट्स की इस जीत के जरिए अमेरिकी जनता ने अपना स्पष्ट फैसला सुना दिया है।
चीन ने इन चुनाव नतीजों को अमेरिका का आंतरिक मामला बताया है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने नियमित प्रेस वार्ता में कहा कि उनका देश संबंधों को बेहतर बनाने के लिए अमेरिका के साथ काम करता रहेगा। चीन दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच बनी सहमतियों को लागू करने, मतभेदों को सुलझाने और निष्पक्षता के आधार पर स्थिर रिश्ते कायम करने का पूरा इच्छुक है।
टेक्सास सीनेट चुनाव में अरबपति एलन मस्क और अन्य दानदाताओं द्वारा खर्च किया गया भारी पैसा रिपब्लिकन पार्टी पर ही भारी पड़ गया। एक रिपब्लिकन रणनीतिकार पैट्रिक मारा ने बताया कि आमतौर पर चुनावी फंड मददगार होता है, लेकिन यहां इसने डेटा सेंटर विवाद को सीधे तौर पर हवा दे दी। साथ ही, उन्होंने केन पैक्सटन को एक बेहद कमजोर उम्मीदवार बताया, जिनका नाम कई व्यक्तिगत विवादों से जुड़ा रहा है।
इस चुनाव में ट्रंप प्रशासन की नीतियों को नकारते हुए डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी कांग्रेस पर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। कंसास, टेक्सास और साउथ कैरोलिना जैसे पारंपरिक रिपब्लिकन गढ़ों में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने दशकों पुराने चुनावी रिकॉर्ड पूरी तरह तोड़ दिए हैं।
मिशिगन में डेमोक्रेट अब्दुल अल-सैयद ने कड़े मुकाबले में रिपब्लिकन माइक रोजर्स को हराकर इतिहास रच दिया है। वह अमेरिकी सीनेट में चुने जाने वाले पहले मुस्लिम सांसद बन गए हैं। वहीं, इल्हान उमर ने भी अपनी हाउस सीट बरकरार रखी है, जबकि राष्ट्रपति ने खुलेआम उनसे इस्तीफा मांगा था। पश्चिमी राज्य ओरेगन की बात करें तो टीना कोटेक ने एक बार फिर गवर्नर पद का चुनाव जीतकर अपनी सत्ता कायम रखी है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस करारी हार का एक मुख्य कारण ईरान के साथ चल रहे युद्ध को भी माना है। उन्होंने स्वीकार किया कि शायद मतदाता पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण उपजी अल्पकालिक परेशानियों को सहने के लिए तैयार नहीं थे। इसके बावजूद, उन्होंने यह जरूर कहा है कि वह चुनाव के नतीजों को पूरी तरह स्वीकार करेंगे।
डेमोक्रेटिक पार्टी ने जॉर्जिया, मिशिगन, न्यू हैम्पशायर और नॉर्थ कैरोलिना जैसे प्रमुख स्विंग राज्यों के साथ-साथ आयोवा जैसे रिपब्लिकन दबदबे वाले इलाकों में भी शानदार जीत दर्ज की है। एक राष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक, लगभग तीन-चौथाई मतदाता देश की वर्तमान दिशा से काफी गुस्से और भारी असंतोष में थे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नई डेमोक्रेटिक कांग्रेस सत्ता की जवाबदेही तय करेगी। जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय की वरिष्ठ शोधकर्ता लॉरा ब्लेसिंग का मानना है कि डेमोक्रेट्स अब जांच के लिए अपनी संवैधानिक शक्तियों का खुलकर और सक्रिय रूप से इस्तेमाल करेंगे।
सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल के सीनेट की स्थायी जांच उपसमिति के अध्यक्ष बनने की पूरी संभावना है। चुनाव से पहले ही ब्लूमेंटल ने स्पष्ट कर दिया था कि वे सत्ताधारी प्रशासन की गतिविधियों की जांच के लिए अपने कानूनी अधिकारों का पूरी तरह से प्रयोग करेंगे।
व्हाइट हाउस की मंजूरी के बिना होने वाली कांग्रेस की ये जांचें भविष्य में बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सभी अधिकारी इसमें सहयोग करेंगे, क्योंकि वे सीनेट के किसी भी समन को सीधे अदालत में चुनौती दे सकते हैं। इस कानूनी दांव-पेंच से जांच की प्रक्रिया में महीनों या सालों की देरी होने की भी पूरी आशंका है।
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