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अडानी पोर्ट्स का मेगा प्लान: AI से पोर्ट संचालन में क्रांति लाने के लिए अमेरिकी कंपनी कैलेरिस के साथ बढ़ाई साझेदारी

| Updated: June 16, 2026 18:32

अडानी पोर्ट्स और कैलेरिस की साझेदारी से 15 टर्मिनलों पर लागू होगी AI तकनीक, 2030 तक 1 अरब टन कार्गो हैंडलिंग का है बड़ा लक्ष्य।

अहमदाबाद। भारत के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) ने अपने पोर्ट और लॉजिस्टिक नेटवर्क को और भी ज्यादा आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अगली पीढ़ी की क्षमताओं को विकसित करने के लिए अमेरिका स्थित कैलेरिस (Kaleris) के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी का विस्तार किया है। इस करार के तहत दोनों कंपनियां मिलकर 9 बंदरगाहों पर फैले 15 कंटेनर टर्मिनलों में एआई-आधारित प्लग-एंड-प्ले ऑपरेटिंग प्लेटफॉर्म तैनात करेंगी।

यह अहम साझेदारी अडानी पोर्ट्स के व्यापक लक्ष्यों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अपनी 2031 की महत्वाकांक्षी योजना के तहत कंपनी तकनीक और डीकार्बोनाइजेशन पर 850 मिलियन अमेरिकी डॉलर का भारी-भरकम निवेश करने जा रही है। इसी कड़ी में, कैलेरिस के साथ साझेदारी के माध्यम से स्वचालन (ऑटोमेशन) और अनुकूलन (ऑप्टिमाइजेशन) को तेज करने के लिए दो चरणों में 100 मिलियन डॉलर तक का अलग से निवेश किया जाएगा।

इस बहु-वर्षीय समझौते से कंपनी के संचालन में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। कैलेरिस अपने अत्याधुनिक ‘टर्मिनल ऑपरेटिंग सिस्टम’ (TOS) और एआई-संचालित कंटेनर हैंडलिंग समाधानों को APSEZ के 15 टर्मिनलों पर लागू करेगा। छह बंदरगाहों पर पहले चरण की शानदार सफलता के बाद, अब इस तकनीक को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा। इससे कंपनी को एक मजबूत डिजिटल आधार मिलेगा, जिससे काम में तेजी, एकरूपता और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।

नई तकनीक के इस्तेमाल से कंपनी को 2030 तक 91 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) की अतिरिक्त क्षमता हासिल होने की उम्मीद है, जो स्थापित क्षमता का लगभग 10 प्रतिशत है। इसके अलावा, कैलेरिस के ‘एडवांस्ड ऑप्टिमाइजेशन’ समाधान से रबर टायर्ड गैन्ट्री (RTG) क्रेन की उत्पादकता में 20 प्रतिशत और टर्मिनल ट्रक की उत्पादकता में 14 प्रतिशत तक का सीधा सुधार देखने को मिलेगा। यह दीर्घकालिक विकास और एक मजबूत ट्रांसपोर्ट प्लेटफॉर्म बनाने के अडानी पोर्ट्स के दृष्टिकोण को और पुख्ता करता है।

इस बड़ी पहल पर बात करते हुए APSEZ के पूर्णकालिक निदेशक और सीईओ अश्वनी गुप्ता ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऑटोमेशन आने वाले समय में पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स की दुनिया में प्रतिस्पर्धा का नया पैमाना तय करेगा। उन्होंने बताया कि कंपनी ने पहले ही एक बेहतरीन डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर लिया है, लेकिन कैलेरिस के जुड़ने से उत्पादकता और टर्नअराउंड समय में जबरदस्त सुधार होगा, जिससे ग्राहकों को हमेशा एक विश्वस्तरीय अनुभव मिलेगा।

वहीं, कैलेरिस के अध्यक्ष और सीईओ किर्क नॉफ ने इस साझेदारी पर खुशी जताते हुए कहा कि अडानी पोर्ट्स बड़े पैमाने पर एआई-सक्षम पोर्ट नेटवर्क का असली प्रभाव दुनिया को दिखा रहा है। 15 टर्मिनलों तक इस साझेदारी का विस्तार उन बेहतरीन नतीजों और भरोसे का प्रतीक है जो दोनों कंपनियों ने साथ मिलकर हासिल किए हैं। उनका मानना है कि N4 और उनके उन्नत समाधानों के जरिए अब पूरे नेटवर्क में सफलता और दक्षता को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।

जैसे-जैसे कार्गो की मात्रा बढ़ रही है और ग्लोबल सप्लाई चेन जटिल होती जा रही है, APSEZ अपनी संचालन क्षमता बढ़ाने के लिए एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और कंप्यूटर विज़न जैसी आधुनिक तकनीकों में भारी निवेश कर रहा है। कैलेरिस के N4 टर्मिनल ऑपरेटिंग सिस्टम के विस्तार से यार्ड के इस्तेमाल में सुधार होगा, जहाजों की आवाजाही में तेजी आएगी और ग्राहकों के लिए कार्गो की सुचारू डिलीवरी सुनिश्चित की जा सकेगी।

इन सभी रणनीतिक प्रयासों का अंतिम लक्ष्य 2030 तक सालाना एक अरब टन (वन बिलियन टन) कार्गो संभालने की APSEZ की महात्वाकांक्षा को पूरा करना है। कंपनी की तेज रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां पहले 100 MMT कार्गो के आंकड़े तक पहुंचने में एक दशक से ज्यादा का समय लगा था, वहीं अब पोर्ट, रेल, सड़क और गोदामों के बेहतरीन नेटवर्क के दम पर अगले सभी मुकाम पहले से कहीं अधिक तेजी से हासिल किए जा रहे हैं।

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