गांधीनगर: गुजरात सरकार सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए एक बड़ा और अहम कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए परिवार की वार्षिक आय सीमा को बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने पर विचार कर रही है। इस फैसले से शैक्षणिक और स्वरोजगार सहायता प्राप्त करने वाले युवाओं का दायरा काफी बढ़ जाएगा और ज्यादा से ज्यादा लोग इन योजनाओं के पात्र बन सकेंगे।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने गुजरात अनारक्षित शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास निगम (GUEEDC) के तहत चलने वाली योजनाओं के लिए आय के मापदंडों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के अनुसार, पिछले करीब एक दशक से यह सीमा स्थिर थी। अब इसे अधिकांश योजनाओं के लिए मौजूदा 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये किए जाने की प्रबल संभावना है।
इस बदलाव से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विभाग यह गहराई से आकलन कर रहा है कि अनारक्षित वर्ग के युवाओं के लिए आय सीमा को किस स्तर तक बढ़ाया जाए। आने वाले कुछ ही हफ्तों में आय सीमा को 10 लाख रुपये किए जाने की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। वर्तमान में GUEEDC की ज्यादातर योजनाओं में 6 लाख रुपये और कुछ चुनिंदा योजनाओं में 8 लाख रुपये तक की आय वाले आवेदक ही लाभ ले सकते हैं।
इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भी उसी स्तर का लाभ मुहैया कराना है, जो वर्तमान में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लाभार्थियों को दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि सभी वर्गों के युवाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।
आय सीमा बढ़ाने के साथ-साथ सरकार GUEEDC के तहत बिना किसी गारंटी (कोलैटरल-फ्री) के लोन देने की योजना पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। मौजूदा समय में एससी और एसटी लाभार्थियों के लिए कई ऐसी ऋण योजनाएं हैं जिनमें संपत्ति गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, GUEEDC के तहत फिलहाल ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिस पर अब विभाग विचार कर रहा है।
GUEEDC मुख्य रूप से अनारक्षित वर्ग के पात्र लोगों को विदेश में उच्च शिक्षा, स्वरोजगार और अन्य जरूरी उद्देश्यों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करता है। गौरतलब है कि पाटीदार समुदाय सहित अनारक्षित वर्गों द्वारा शैक्षणिक और आर्थिक मदद की मांग को लेकर किए गए व्यापक आंदोलनों के बाद, सितंबर 2017 में इस निगम की स्थापना की गई थी। तब से यह अनारक्षित वर्गों के कल्याण के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में काम कर रहा है।
अगर इन दोनों अहम सुधारों को मंजूरी मिल जाती है, तो यह अपनी स्थापना के बाद से GUEEDC के कामकाज का सबसे बड़ा विस्तार होगा। इससे राज्य के हजारों अतिरिक्त परिवार सीधे तौर पर सरकारी सहायता के दायरे में आ जाएंगे। साथ ही, अनारक्षित वर्ग के महत्वाकांक्षी छात्रों और नए उद्यमियों के लिए अपना सपना पूरा करने हेतु कर्ज हासिल करना पहले के मुकाबले कहीं अधिक आसान हो जाएगा।
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