गुजरात से एक बेहद हैरान करने वाला आपराधिक मामला सामने आया है। यहां एक शख्स ने अपने ही भतीजे की कैंसर से हुई मौत को सड़क हादसा बता दिया। इस खौफनाक साजिश का मकसद सिर्फ बीमा कंपनी से लाखों रुपये ऐंठना था। गांधीनगर जिले की लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) ने गुप्त सूचना के आधार पर 21 साल से फरार चल रहे इस मुख्य आरोपी मुकेश पटेल को कलोल से गिरफ्तार कर लिया है।
इस फर्जीवाड़े का खुलासा साल 2005 में तब हुआ था जब सीआईडी (क्राइम) के एक अधिकारी को इस धोखाधड़ी की भनक लगी। इसके तुरंत बाद आरोपी मुकेश पटेल के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मामला दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी पिछले दो दशकों से पुलिस को चकमा दे रहा था।
जांचकर्ताओं के अनुसार, इस पूरे षड्यंत्र में आरोपी मुकेश पटेल के साथ उसका भाई भी शामिल था। इसके अलावा साबरकांठा में तैनात तत्कालीन पुलिस उप-निरीक्षक, एक डॉक्टर और कुछ अन्य लोगों ने मिलकर इस झूठी कहानी को सच साबित करने की कोशिश की। इन सभी ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए ताकि कैंसर से जान गंवाने वाले मरीज की मौत को सड़क दुर्घटना साबित किया जा सके।
दरअसल, मृतक ब्लड कैंसर का मरीज था और 1995 से 1999 के बीच एमपी शाह अस्पताल में उसका इलाज चला था। 18 मई 1999 को प्रतापपुरा गांव स्थित अपने घर पर उसने दम तोड़ दिया। मौत के ठीक तीन दिन बाद, पटेल ने विजयनगर पुलिस स्टेशन के एक सब-इंस्पेक्टर से सांठगांठ करके सड़क हादसे की एक झूठी एफआईआर दर्ज करवा दी।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस मामले को एक दुर्घटना के रूप में आगे बढ़ाया गया, जबकि जांच के लिए कोई शव पेश ही नहीं किया गया था। एक भ्रष्ट डॉक्टर ने बिना शव देखे ही पोस्टमार्टम के कागजात तैयार कर दिए। वहीं, ग्राम पंचायत ने भी नियमों को ताक पर रखते हुए एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
इन सभी फर्जी दस्तावेजों को असली बताकर बीमा कंपनी में जमा किया गया। इसका सीधा फायदा उठाते हुए आरोपियों ने मृतक की जीवन बीमा पॉलिसी से 5 लाख रुपये का क्लेम हासिल कर लिया। लालच यहीं नहीं रुका, आरोपी ने गांधीनगर स्थित मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में भी इन्हीं कागजातों के आधार पर 15 लाख रुपये के मुआवजे का दावा ठोक दिया। इस कानूनी प्रक्रिया के जरिए उसने 57,000 रुपये और ऐंठ लिए।
पुलिस इस मामले में पहले ही कई अहम गिरफ्तारियां कर चुकी है। झूठी शिकायत दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारी, फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने वाले डॉक्टर, ग्राम पंचायत के अधिकारी सहित मृतक की पत्नी और उसके चचेरे भाई को पहले ही सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। अब मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
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