अहमदाबाद: गुजरात के आवास बाजार में एक दिलचस्प और विचारणीय रुझान सामने आ रहा है। राज्य में घर खरीदने के लिए कर्ज लेने वाले लोगों की संख्या में तेजी से कमी आई है, लेकिन जो लोग लोन ले रहे हैं, वे पहले की तुलना में काफी बड़ी रकम उधार ले रहे हैं।
स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में नए होम लोन खातों की संख्या में 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह आंकड़ा घटकर 93,716 रह गया। इसके विपरीत, होम लोन वितरण की कुल राशि 24 प्रतिशत बढ़कर 17,600 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। वहीं, प्रति व्यक्ति औसत लोन का आकार सालाना आधार पर 72 प्रतिशत की जोरदार छलांग लगाकर 18.8 लाख रुपये हो गया।
बैंकिंग और रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल संपत्तियों की बढ़ती कीमतों को ही नहीं दर्शाता, बल्कि यह भी दिखाता है कि निर्माण लागत में बढ़ोतरी के चलते मध्यम और कम बजट वाले खरीदारों के लिए अपना घर खरीदना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस वजह से गुजरात का हाउसिंग मार्केट दो स्पष्ट वर्गों में बंटता नजर आ रहा है।
क्रेडाई (CREDAI) गुजरात के सचिव विरल शाह ने बताया कि पूरे राज्य में जमीन और निर्माण लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिससे रिहायशी संपत्तियों के दाम काफी बढ़ गए हैं। चूंकि आम खरीदारों की आय उस रफ्तार से नहीं बढ़ी है, इसलिए उनके लिए घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। वर्तमान में केवल उच्च क्रय शक्ति वाले ग्राहक ही बाजार में सक्रिय हैं और वे बड़ा कर्ज लेने में सक्षम हैं।
शाह के मुताबिक, अहमदाबाद के स्थापित इलाकों जैसे नारनपुरा, राणिप, नवरंगपुरा और पालड़ी में पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) तेज गति पकड़ रहा है, क्योंकि लोग इन पुराने और सुसज्जित इलाकों में रहना पसंद कर रहे हैं। दूसरी ओर, शहर के बाहरी इलाकों में मांग सुस्त पड़ रही है, जहां मकान बनाने की लागत और खरीदार की क्षमता के बीच का अंतर काफी चौड़ा हो चुका है।
बैंकिंग सूत्रों के अनुसार, अहमदाबाद के बाहरी क्षेत्रों जैसे शेला, साउथ बोपल, गोधवी, शीलज, गोटा, ओगणज, ओधव, त्रागड़ और निकोल में एक सामान्य 3-बीएचके फ्लैट की कीमत करीब 1 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गई है। यह इतनी बड़ी रकम है कि हर वेतनभोगी व्यक्ति के लिए इसे वहन करना आसान नहीं रह गया है।
बाजार का यह नया रुख डेवलपर्स के लिए भी मध्यम श्रेणी के सेगमेंट में दबाव पैदा कर रहा है। जहां प्रीमियम हाउसिंग को संपन्न खरीदार मिल रहे हैं, वहीं सीमित बजट वाले ग्राहकों पर निर्भर प्रोजेक्ट्स को बिक्री के मोर्चे पर कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
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