बनासकांठा में नर्मदा का पानी लाए सरकार नहीं तो होगा आंदोलन -जिग्नेश मेवाणी

| Updated: June 20, 2022 5:41 pm

  • 21 जून को मुख्यमंत्री से करेंगे आख़िरी मुलाकात

बनासकांठा जिला के पानी का मुद्दा हर चुनाव की तरह इस बार भी चुनावी मुद्दा बनेगा। जब गुजरात के कई इलाकों में मानसून प्रवेश कर गया और ज्यादातर हिस्सों में प्रवेश की तैयारी है , बनासकांठा में पानी के लिए संघर्ष हो रहा है , महिलाये प्रधानमंत्री को पत्र लिख रही है , मुख्यमंत्री अधिकारियों को भेजने की बात कर रहे हैं। वहीं वडगाम के निर्दलीय कांग्रेस समर्थित विधायक जिग्नेश मेवाणी ने गुजरात प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में ऐलान किया की वह लगातार इस मामले को सदन के अंदर और बाहर उठा रहे हैं , अब आखरी मुलाकात 21 जून को मुख्यमंत्री से करेंगे। सरकार एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर नर्मदा नदी के पानी से करामावत झील और मुक्तेश्वर बांध भरने के लिए योजना बना कर बजट आवंटित करे।

इस दौरान निर्दलीय विधायक ने आरोप लगाया की पिछले तीस साल से सरकार केवल बनासकांठा के लोगों को मुर्ख बना रही है , हर चुनाव में कहते है इस बार करामावत झील और मुक्तेश्वर बांध को नर्मदा के पानी से भर दिया जायेगा लेकिन अभी तक ना कोई योजना बनी है और ना ही किसी तरह का बजट आवंटित हुआ है। 1200 से 1500 फ़ीट जल स्तर नीचे जाना आम बात है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा की 2040 तक गुजरात समेत देश में 80 करोड़ लोग प्यासे होंगे।

लेकिन बनासकांठा में अभी से लोग प्यासे है। 15000 किसानों ने रैली निकली जिसमे तमाम जाति धर्म के लोग शामिल थे ,लेकिन सरकार ने केवल दिखावा किया ,मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल कहते हैं की अधिकारियों की टीम भेजी है। लेकिन किस बात के लिए टीम भेजी है। योजना तैयार है केवल नर्मदा के पानी को आगे तक बढ़ाना है , इसे पूरा कीजिये बजट आवंटित कीजिये।

महिलाये प्रधानमंत्री को पत्र लिख रही है , क्योकि उन्होंने खा था की कोई तकलीफ हो तो पत्र लिखना लेकिन अब पत्र की भी सुनवाई नहीं हो रही है अगर मुख्यमंत्री उनकी बात नहीं मानते तो सड़क पर आंदोलन किया जायेगा। मेवाणी ने भरोसा दिलाया की अगर सरकार योजना बनाती है तो कांग्रेस समर्थन करेगी।

प्रधानमंत्री को गुजरात की 50000 प्यासी बहनों ने लिखा पत्र , “भाई कुछ करो , नहीं पानी के बिना मर जायेंगे “

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