विपुल चौधरी की सिफारिश करने पर अर्जुन मोढवाडिया और शंकर सिंह वाघेला को मेहसाणा कोर्ट का सम्मन

| Updated: September 17, 2022 5:51 pm

गुजरात के पूर्व गृह मंत्री और दूधसागर डेयरी के पूर्व चेयरमैन विपुल चौधरी (Vipul Chaudhary, former home minister of Gujarat and former chairman of Dudhsagar Dairy) की गिरफ्तारी के बाद कई राजनेता जाँच के घेरे में पहले ही दौर में आते दिख रहे हैं , , उत्तर गुजरात की राजनीति के लम्बे समय तक केंद्र रहे चौधरी को एनडीबीडी NDBD का चेयरमैन बनाने के लिए कथित तौर गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला( Former Chief Minister Shankar Singh Vaghela )और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अर्जुन मोढवाडिया (Former Leader of Opposition Arjun Modhwadia) ने सिफारिशी पत्र लिखा था। इसी पत्र के सिलसिले में गवाह के तौर पर मेहसाणा कोर्ट ने वाघेला और मोढवाडिया को नोटिस इस्यु किया है। दोनों नेताओं को 6 अक्टूबर को अदालत में पेश होना है।

गौरतलब है कि शंकर \सिंह वाघेला और अर्जुन मोढवाडिया ने उसी समय सिफारिश के पत्र लिखे थे, उसी समय विपुल चौधरी ने सागरदाण को महाराष्ट्र Maharashtra भेजा था। वर्तमान में विपुल चौधरी को सागरदाण महाराष्ट्र भेजने और एनडीडीबी का अध्यक्ष बनने के लिए कदाचार करने का आरोप में दो दिन पहले क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था. उसके बाद कोर्ट ने उनकी 7 दिन की रिमांड मंजूर कर ली थी। वही लोकअभियोजक विजय बारोट Public Prosecutor Vijay Barot ने अदालत से शंकर सिंह वाघेला और अर्जुन मोढवाडिया को गवाह के तौर पर बुलाने के लिए याचिका दायर की थी , जिसे स्वीकार करते हुए मेहसाणा जिला अदालत ने दोनों नेताओं को 6 अक्टूबर को पेश होने का सम्मन तलब किया है।

दूधसागर डेयरी (Dudhsagar Dairy )में करीब 500 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता के मामले में गिरफ्तार विपुल चौधरी (Vipul Chaudhary) को जिला सत्र न्यायालय ने 7 दिन के रिमांड (remand ) पर भेज दिया है। वहीं दूसरी तरफ चौधरी की गिरफ्तारी का राजनीतिक असर भी दिखा।

इसके पहले शनिवार को गुजरात के सहकारी क्षेत्र का एक प्रमुख चेहरा और 1996 में शंकरसिंह वाघेला सरकार में गृह मंत्री रहे चौधरी के समर्थको ने अदालत परिसर के बाहर और उत्तर गुजरात के कई तहसील मुख्यालय में विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस को समर्थकों की विशाल संख्या के कारण आरोपी को पिछले गेट से अदालत में ले जाना पड़ा। चौधरी (Vipul Chaudhary) गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) के पूर्व अध्यक्ष हैं, जो अमूल ब्रांड के मालिक हैं, और उन्होंने मेहसाणा के दूधसागर डेयरी का भी नेतृत्व किया है। चौधरी के समर्थन में 30 से अधिक नेताओं ने भाजपा से त्यागपत्र दे दिया।

गिरफ्तारी के बाद गुजरात के सहकारी क्षेत्र (Cooperative Sectors of Gujarat) का एक प्रमुख चेहरा और 1996 में शंकरसिंह वाघेला सरकार (Shankarsinh Vaghela Govt.) में गृह मंत्री (Home Minister )रहे विपुल चौधरी (Vipul Choudhary )को सामान्य आरोपी की तरह क्राइम ब्रांच के लाकअप Crime Branch lockup में पूरी रात रखा गया। केवल एक पंखा के सहारे रात बिताना उत्तर गुजरात के इस ओबीसी नेता के लिए मुश्किल था , पहली रात क्राइम ब्रांच कोई वरिष्ठ अधिकारी भी नहीं गया। विपुल चौधरी को गिरफ्तार करने गयी क्राइम ब्रांच की टीम के एक सदस्य के मुताबिक क्राइम ब्रांच को देखकर विपुल चौधरी किसी आम आरोपी की तरह एक बार बचने का मौका देने के लिए गिड़गिड़ाने लगे थे , वह ” कुछ भी ” देने के लिए तैयार थे।

इस मामले में एक अहम् खुलासा यह हुआ है की जिस वकील की फीस डेयरी से दी गयी असल में वह वकील है ही नहीं। अब इस मामले की जाँच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ( ACB ) विपुल चौधरी द्वारा बनायीं गयी कंपनी और उनके डायरेक्टरों की भूमिका की भी जाँच की दिशा में आगे बढ़ रही है।विपुल चौधरी की विविध कंपनियों के निदेशकों ने क्या बैंक प्रोजेक्शन , कंपनी के माध्यम से वित्तीय लेनदेन में किसी तरह की हेराफेरी की है , या नहीं जैसे पहलुओं की जाँच की जाएगी। इस जांच में विपुल चौधरी के साथ गिरफ्तार हुए उनके सीए को भी साथ रखा जाएगा।

भ्रष्टाचार निरोधक शाखा विपुल चौधरी के कनाडा , अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में कथित निवेश की भी जाँच की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक विपुल से पूंछताछ के दौरान कई बड़े चेहरे बेनकाब होंगे , यदि उनकी संलिप्तता किसी तरह के आरोप में पायी जाती है तो उन्हें भी गिरफ्तार किया जायेगा। अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके यदि किसी से वसूली की गयी हो तो उन पर भी कार्यवाही की जाएगी।

एसीबी के 10 दिन के रिमांड की मांग के सामने मेहसाणा विशेष अदालत के जज ए एल व्यास ने 7 दिन का रिमांड मंजूर किया है. पायनियर लॉजिक फायनेंसियल सॉल्यूशन कंपनी का आधिकारिक पता तिलक रोड डोंबिवली ( ईस्ट ) थाणे है लेकिन यहां कोई कंपनी नहीं है , जबकि किराये पर एक सामान्य परिवार रहता है।

जबकि दूसरी कंपनी प्राचीन बायोटेक एलएलपी अहमदाबाद G I D C में दर्ज है , लेकिन ना तो यहा कोई कंपनी है और ना ही कोई दवा बनती है। इसी तरह भवन निर्माण से जुड़ी देवमीत इंफ्रास्ट्रक्चर ने 2015 -2019 तक कोई व्यवसाय नहीं किया।
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विपुल चौधरी के कई व्यवसाय होने के कारण उनके कई भागीदार थे। क्राइम ब्रांच ने विपुल चौधरी को गिरफ्तार करने के बाद एक पूर्व गृह मंत्री के दामाद के घर पहुंच गयी। वह विपुल के कई कंपनियों में डायरेक्टर थे , क्राइम ब्रांच के आने की सूचना पूर्व गृह मंत्री को मिलने पर उन्होंने उच्च अधिकारियों से संपर्क कर साफ़ कर दिया कि उन पर हाथ डालना महगा पड़ेगा ,जिसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम वापस गयी।

गुजरात में विपुल चौधरी के घोटाले में और अनियमितताएं पाई गईं

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