‘महत्वपूर्ण है, समय पर पढ़ें’ – एक नई किताब के हवाले से राहुल गांधी कहते हैं कि चीन भारत को 10 दिनों में हरा देगा

| Updated: August 6, 2022 7:03 pm

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उस नई किताब का समर्थन किया है, जिसमें कहा गया है कि चीन संघर्ष की स्थिति में भारत को 10 दिनों में हरा सकता है। और, अरुणाचल प्रदेश के साथ-साथ लद्दाख पर भी कब्जा कर सकता है।

द लास्ट वॉर: हाउ एआई विल शेप इंडियाज फाइनल शोडाउन विद चाइना’ नाम की पुस्तक पूर्व सेना अधिकारी प्रवीण साहनी ने लिखी है। इस किताब में है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) भविष्य में भारत-चीन संघर्षों को कैसे प्रभावित करेगी। यह किताब 10 अगस्त को रिलीज होने वाली है।

इसके मुखपृष्ठ पर एक ब्लर्ब में राहुल गांधी ने इसे “महत्वपूर्ण और समय पर पढ़ा जाने वाला” कहा है। कांग्रेस नेता ने लिखा, “सहमत हों या असहमत, हम जिस अशांत समय में रह रहे हैं, उसे लेकर प्रवीण साहनी का गहन और परेशान करने वाला विश्लेषण एक महत्वपूर्ण और समय पर पढ़ा जाने वाला विश्लेषण है।”

दोनों देशों के बीच एक युद्ध होने की स्थिति पर किताब कहती है, “चीन जानमाल का कम से कम नुकसान करते हुए भी अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख को ले सकता है और भारत इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं कर सकता ऐसा इसलिए है क्योंकि भारतीय सेना गलत युद्ध की तैयारी कर रही है।”

लेखक यह भी लिखता है कि भारत के साथ चीन का युद्ध 1991 के खाड़ी युद्ध की “याद” दिला देगा।

किताब में लिखा है, “अमेरिकी सेना के युद्ध नेटवर्क ने सेंसर को निशानेबाजों और निर्देशित युद्धपोतों को अंतरिक्ष से जोड़ दिया था, जिससे दुनिया भर की सेनाओं में सदमा और खौफ पैदा कर दिया था। इसी तरह, भारत के साथ चीन का युद्ध कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उभरती प्रौद्योगिकियों, मल्टी-डोमेन ऑपरेशन, कल्पनाशील युद्ध अवधारणाओं, मनुष्यों और बुद्धिमान रोबोटों के बीच सहयोग से दुनिया को चौंका देगा। चीन 2017 के डोकलाम संकट के बाद से ही इसके लिए तैयारी कर रहा है, जिसके बाद उसने वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार अपने सैनिकों को स्थायी रूप से बढ़ा चुका है।

लेखक ने यह भी कहा कि पुस्तक में उन्होंने चीन-पाकिस्तान की मिलीभगत के संदर्भ में गांधी के साथ चर्चा की। इसमें राहुल ने कहा कि मोदी सरकार के पाकिस्तान के प्रति जुनून ने उनकी सोच को धूमिल कर दिया है।

लेखक ने गांधी को यह कहते हुए उद्धृत किया है, “2014 के बाद से हमारी सरकार ने भारत के वैश्विक दृष्टिकोण को एक पागल बिंदु – पाकिस्तान तक सीमित कर दिया है। पाकिस्तान के प्रति हमारे नेतृत्व के जुनून ने उनकी सोच और रणनीतिक निर्णय पर पानी फेर दिया है। नतीजतन, हमारी सरकार यह समझने में असमर्थ है कि चीन और पाकिस्तान एक हो गए हैं और हम पूरी तरह से नए दुश्मन का सामना कर रहे हैं। ”

पीएम को देश की रक्षा करनी चाहिए’

कांग्रेस नेता ने अक्सर मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं, खासकर लद्दाख में भारतीय क्षेत्र में चीनी पीएलए के अतिक्रमण के संदर्भ में। गांधी ने चीन द्वारा पैंगोंग त्सो झील पर एक पुल बनाने की खबरों का जवाब दिया था कि, “भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता अटल है। एक डरपोक और विनम्र प्रतिक्रिया से काम नहीं चलेगा। पीएम को राष्ट्र की रक्षा करनी चाहिए। ”

राहुल ने चीनी घुसपैठ के बारे में ‘चुप्पी’ साधने पर अक्सर प्रधानमंत्री को आड़े हाथ लिया है। गांधी ने पिछले साल नवंबर में ट्वीट किया था, “हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा से अनुचित रूप से समझौता किया गया है, क्योंकि भारत सरकार के पास कोई रणनीति नहीं है और 56 इंच वाले मिस्टर डरे हुए हैं। मेरे विचार सैनिकों के साथ हैं, जो हमारी सीमाओं की रक्षा के लिए जान जोखिम में डाल रहे हैं, जबकि भारत सरकार झूठ का सहारा ले रही है। ”

किताब कहती है कि भारतीय सेना एआई युद्ध के लिए तैयार नहीं है

किताब 2024 में चीन से एक काल्पनिक साइबर हमले के साथ शुरू होती है, और इस मामले में प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी और अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठानों के बीच काल्पनिक बातचीत का ब्योरा देती है। इसमें आईएनएस विक्रांत को “40,000 टन पर 1,600 की जनशक्ति के साथ एक तैरता हुआ शहर” कहा जाता है, यह कहते हुए कि यह भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी सैन्य आपदा होगी।

एआई युद्ध की गंभीरता को समझाते हुए किताब में एक वाक्य इस तरह है, “वे मनुष्य के सिर में बड़ी तेजी से घुसते हैं और विस्फोट करते हैं। ऐसा लगता है कि उनके पास किसी प्रकार की चेहरे की पहचान वाली तकनीक है। वे केवल मनुष्यों को मार रहे हैं। ” इस अध्याय में लेखक भारतीय सुरक्षा और सैन्य बलों की असहायता पर भी ध्यान केंद्रित करता है, जो एआई युद्ध से निपटने के लिए तैयार नहीं हैं, जबकि चीन के पास सबसे आधुनिक एआई तकनीक है।

एक अन्य अध्याय में उरी में सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाते हुए साहनी ने लिखा है कि भारतीय वायु सेना ने दावा किया था कि इस हवाई हमले में कई आतंकवादी मारे गए थे, जबकि वायु सेना नुकसान दिखाने के लिए कोई फुटेज पेश नहीं कर सकी। .

उसी अध्याय में डोकलाम मुद्दे पर लेखक का दावा है कि चीन डोकलाम में योजना के साथ आया था। उसने एक ऐसी जगह पर सैन्य संकट शुरू किया, जहां भारतीय सेना संख्या में कम होने के कारण आत्मविश्वास में कमी महसूस करती, जिससे पीएलए को आगे बढ़ने का बहाना मिल जाएगा। किताब पूछती है, “भारतीय सेना इतनी आक्रामक और बिना सोचे-समझे पीएलए के जाल में क्यों फंस गई।”

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