वियतनाम में हीरे की तस्करी के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसके सीधे तार भारत के सूरत शहर से जुड़े पाए गए हैं। अधिकारियों ने कड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 10 मिलियन डॉलर के इस अवैध व्यापार को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। इस रैकेट ने पैसेंजर कूरियर का इस्तेमाल कर अब तक करीब 28,000 हीरों की तस्करी को अंजाम दिया था।
वियतनाम के जांचकर्ताओं के अनुसार, यह नेटवर्क आधिकारिक व्यापारिक रास्तों को दरकिनार करते हुए हांगकांग के जरिए भारत से हीरे वियतनाम लाता था। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि इन हीरों को कस्टम विभाग को बिना कोई जानकारी दिए यात्रियों के सामान, कपड़ों और जूतों में बड़ी चालाकी से छिपाकर लाया जाता था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि साल 2024 से अब तक इस नेटवर्क ने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के जरिए 141 खेपों को सफलतापूर्वक अपने गंतव्य तक पहुंचाया था।
इस बड़े अभियान में जांच एजेंसियों ने 31 लोगों की पहचान की है जो इस तस्करी तंत्र का हिस्सा थे। इनमें 32 वर्षीय भारतीय नागरिक अभिषेक पटेल का नाम प्रमुखता से शामिल है, जिस पर इस पूरे गिरोह का संचालन करने का पुख्ता संदेह है।
फिलहाल जांच एजेंसियां इस समूह के लॉजिस्टिक्स, वित्तीय लेन-देन और पूरे सोर्सिंग नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं। जांच का एक मुख्य फोकस इस बात पर भी है कि आखिर कूरियर के जरिए बार-बार होने वाली यह तस्करी लंबे समय तक कस्टम की नजरों से कैसे बचती रही।
इसी से जुड़े एक अन्य मामले में शैलेश प्रजापति नामक व्यक्ति पर भी गंभीर आरोप लगे हैं, जिसके तार कथित तौर पर सूरत से जुड़े बताए जा रहे हैं। प्रजापति पर आरोप है कि उसने अपनी कई हवाई यात्राओं के दौरान कस्टम विभाग को बिना घोषित किए लगभग 1,500 हीरों की वियतनाम में तस्करी की।
उसे अक्टूबर 2024 में हो ची मिन्ह सिटी के टैन सोन न्हाट अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था। उस समय जांच अधिकारियों ने उसके पास से 715 छिपे हुए हीरे बरामद किए थे। अधिकारी अब सूरत की एक कंपनी के साथ उसके संभावित संबंधों की भी गहराई से पड़ताल कर रहे हैं।
इस व्यापक जांच ने पूरी दुनिया के हीरा व्यापार जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसका मुख्य कारण यह है कि वियतनाम तेजी से आभूषणों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी जगह बना रहा है।
व्यापारिक आंकड़ों और अनुमानों के मुताबिक, वियतनाम ने 2026 की पहली छमाही में 121 मिलियन डॉलर से अधिक के हीरों का आयात किया है, जिसमें भारत इसका सबसे बड़ा और प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। भारत दुनिया में हीरे काटने और पॉलिश करने वाले सबसे बड़े केंद्रों में गिना जाता है, जिसमें सूरत और मुंबई इस विशाल उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं।
वहीं दूसरी ओर, बढ़ती आय, शहरी मांग और तेजी से विकसित हो रहे खुदरा क्षेत्र के कारण वियतनाम अब आभूषणों के लिए एक प्रमुख उपभोक्ता और निर्माण बाजार के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।
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