गुजरात की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां आजीवन कारावास की सजा काट रहा हत्या का एक दोषी सोमवार सुबह जेल के मुख्य द्वार से आसानी से बाहर निकलकर फरार हो गया। हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के महज़ एक साल बाद और इस जेल में स्थानांतरित होने के छह महीने के भीतर ही उसने भागने में कामयाबी हासिल कर ली।
अधिकारियों के अनुसार, फरार कैदी की पहचान 30 वर्षीय मालदे रामा परमार के रूप में हुई है। सोमवार की सुबह परमार जेल के यार्ड नंबर 4 के ‘बड़ा चक्कर’ में मौजूद 33 कैदियों में शामिल था। इसी दौरान वह किसी की नज़र में आए बिना वहां से रहस्यमय तरीके से गायब हो गया।
इस घटना का खुलासा करीब डेढ़ घंटे बाद तब हुआ जब जेल के अधिकारियों ने कैदियों की गिनती शुरू की। गिनती के दौरान 33 की जगह केवल 32 कैदी ही मौजूद मिले।
कैदी के कम होने की खबर से दोपहर करीब 12 बजे जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। इसके तुरंत बाद जनरल सूबेदार के नेतृत्व में एक दल ने जेल परिसर के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली, लेकिन परमार का कोई सुराग नहीं मिला।
जब अधिकारियों ने जेल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई। फुटेज में परमार सुबह ठीक 10 बजकर 10 मिनट पर जेल के मुख्य द्वार से बेखौफ होकर पैदल बाहर निकलता हुआ दिखाई दिया।
इस मामले में जेलर देवदत्तसिंह आर गोहिल की शिकायत के आधार पर राणीप पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर में बताया गया है कि साल 2023 में पोरबंदर के कमलाबाग पुलिस स्टेशन में परमार के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद 9 मई 2025 को ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
सजा सुनाए जाने के बाद परमार को पोरबंदर स्पेशल जेल से राजकोट सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। बाद में, चिकित्सा उपचार के लिए 16 नवंबर 2025 को उसे साबरमती सेंट्रल जेल में स्थानांतरित किया गया था। भागने के मामले में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, उस पर पहले भी पॉक्सो एक्ट के तहत एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया जा चुका है।
अब पुलिस ने फरार कैदी परमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 262 (हिरासत से भागना) के तहत नया मामला दर्ज कर लिया है। इस घटना को लेकर राणीप पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर बी आर रबारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वे टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हो सके।
इस बड़ी सुरक्षा चूक पर साबरमती जेल के पुलिस अधीक्षक (एसपी) गौरव अग्रवाल ने कहा है कि प्रशासन अभी यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि कैदी जेल से भागने में कैसे सफल रहा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बात की जांच की जा रही है कि इस गंभीर घटना के पीछे किस कर्मचारी की लापरवाही है।
यह भी पढ़ें-
दुनिया के 50 सबसे गर्म शहर एक ही दिन भारत में दर्ज, अप्रैल की इस भीषण गर्मी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
PM मोदी की वर्क फ्रॉम होम की अपील और कानूनी हकीकत: क्या कंपनियां मानेंगी बात?











