3 मई की शाम को सीकर में रहने वाले एक शिक्षक को उनके मकान मालिक से एक हस्तलिखित ‘गेस पेपर’ मिला था। मकान मालिक को यह पेपर केरल में रहने वाले उनके बेटे ने भेजा था और उन्होंने शिक्षक से पूछा कि क्या यह पेपर वाकई में असली है।
नीट (यूजी) 2026 की परीक्षा खत्म होने के कई घंटों बाद, 4 मई को रात करीब 1:30 बजे यह शिक्षक सीकर के उद्योग नगर पुलिस स्टेशन पहुंचे। वह एक प्रमुख कोचिंग संस्थान में पढ़ाते हैं और पुलिस स्टेशन पहुंचते समय उनके हाथ में कई पन्ने मौजूद थे।
उद्योग नगर के एसएचओ राजेश कुमार ने बताया कि शिक्षक अपने साथ कागजातों का एक बंडल लाए थे और हाल ही में संपन्न हुई नीट परीक्षा में अनियमितताओं का आरोप लगा रहे थे।
एसएचओ ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया कि पुलिस ने उन्हें वापस भेज दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस स्टेशन में मौजूद कर्मचारियों ने शिक्षक की पूरी बात सुनी और उन्हें एक खाली कागज देकर अपनी शिकायत लिखित में देने को कहा, लेकिन वह वहां से सीधे चले गए।
दरअसल, जब शिक्षक ने उस ‘गेस पेपर’ का मिलान किया, तो उन्होंने पाया कि उसमें हुबहू वही सवाल थे जो असली नीट परीक्षा में पूछे गए थे। इसकी पुष्टि होने के बाद ही उन्होंने पुलिस से संपर्क करने का फैसला किया था।
अगले कुछ दिनों तक वह इस बात को लेकर असमंजस में रहे कि इस इतने बड़े मामले में आगे कैसे बढ़ा जाए। अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस के पास जाने से पहले उन्होंने कुछ पत्रकारों से भी बात की थी, लेकिन असामान्य परिस्थितियों को देखते हुए पत्रकारों ने उनके आरोपों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अपने कोचिंग सेंटर के मालिक के पूरे समर्थन के बाद ही शिक्षक ने अंततः नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को पत्र लिखने का मन बनाया।
7 मई को रात 9:30 बजे के बाद उन्होंने आखिरकार एनटीए को अपनी विस्तृत शिकायत भेज दी। जानकारी के अनुसार, उनकी शिकायत में लगभग 60 पन्नों की एक पीडीएफ फाइल का जिक्र था जो एक हस्तलिखित दस्तावेज प्रतीत हो रहा था। इसमें रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) के 90 प्रश्न और जीव विज्ञान (बायोलॉजी) के सात-आठ पन्नों के प्रश्न शामिल थे।
शिक्षक ने अपनी शिकायत में लिखा कि वह फोरेंसिक जांच के लिए अपना मोबाइल फोन सौंपने को तैयार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नीट परीक्षा के महत्व और छात्रों के जीवन पर इस तरह की घटनाओं के प्रभाव को देखते हुए उनके पास पुख्ता सबूत हैं।
उन्होंने अपने पत्र में आगे लिखा कि यह मामला किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच की मांग करता है। परिस्थितियां साफ तौर पर दर्शाती हैं कि इसमें गैरकानूनी पहुंच, पेपर का प्रसार और ट्रांसमिशन शामिल है। इसलिए उन्होंने कथित पेपर लीक की तत्काल जांच शुरू करने का अनुरोध किया था।
सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच के बाद शिक्षक को किसी भी तरह की संलिप्तता से मुक्त कर दिया गया। इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि उन्हें वह ‘गेस पेपर’ परीक्षा पूरी होने के बाद ही मिला था।
यह उस शिक्षक का पत्र ही था जिसने एनटीए को केंद्रीय एजेंसियों को सतर्क करने के लिए मजबूर किया। इस कदम के बाद इस पूरे मामले की जांच पहले राजस्थान के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) और अंततः सीबीआई तक पहुंच गई।
यह भी पढ़ें-
भारी विरोध के बाद सीएम विजय का बड़ा फैसला, ज्योतिषी वेत्रिवेल को एक दिन के भीतर OSD पद से हटाया
PM मोदी की वर्क फ्रॉम होम की अपील और कानूनी हकीकत: क्या कंपनियां मानेंगी बात?











