गुजरात: गिर और ग्रेटर गिर के जंगलों के विभिन्न सर्किलों में काम करने वाले लगभग 220 फॉरेस्ट ट्रैकर्स को 10 लाख रुपये तक का दुर्घटना और मेडिक्लेम बीमा कवर प्रदान किया गया है। यह पहल गुजरात स्टेट लायन कंजर्वेशन सोसाइटी के सहयोग से की गई है।
गुजरात सरकार के वन और पर्यावरण विभाग तथा गिर वन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर गुजरात स्टेट लायन कंजर्वेशन सोसाइटी ने ‘द न्यू इंडिया एश्योरेंस’ को इस योजना से जोड़ा है। इस योजना के तहत ट्रैकर्स को 3 लाख से 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलेगा।
बीमा योजना की विस्तृत जानकारी देने के लिए 16 और 17 मई 2026 को सासन गिर के सिंह सदन में ट्रैकर्स के लिए एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।

वन्यजीवों के बीच काम करने के अधिक जोखिम को देखते हुए आम तौर पर बीमा कंपनियां फॉरेस्ट ट्रैकर्स को दुर्घटना कवर और मेडिक्लेम देने के लिए तैयार नहीं होती हैं। हालांकि, परिमल नथवानी के विशेष प्रयासों के कारण न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी गिर और ग्रेटर गिर के फॉरेस्ट ट्रैकर्स को बीमा कवर प्रदान करने के लिए सहमत हुई।
किसी दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना में ट्रैकर की मृत्यु होने पर परिवार को 10 लाख रुपये तक का मुआवजा मिलेगा। इसके अलावा, एक बच्चे की शिक्षा के लिए 25,000 रुपये और दो बच्चों के लिए अधिकतम 50,000 रुपये तक की सहायता राशि भी दी जाएगी।
दुर्घटना के कारण स्थायी विकलांगता, अंग कटने या आंखों की रोशनी जाने की स्थिति में बीमा कवर के नियमों के अनुसार एक निश्चित प्रतिशत का भुगतान किया जाएगा। इसके साथ ही, मेडिकल खर्च, छुट्टी का मुआवजा और मृतक के पार्थिव शरीर को ले जाने का खर्च भी दुर्घटना बीमा नियमों के तहत कवर किया जाएगा।
अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत 3 लाख रुपये का कवर मिलेगा। इसमें सर्जरी, कमरे का शुल्क, डॉक्टर की फीस, जांच और दवाओं का खर्च शामिल है। अस्पताल में भर्ती होने से 30 दिन पहले और छुट्टी मिलने के 60 दिन बाद तक का खर्च भी पॉलिसी के तहत कवर किया जाएगा। इसके अलावा, ट्रैकर्स बीमा कंपनी के विभिन्न नेटवर्क अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा का भी लाभ ले सकेंगे।
परिमल नथवानी ने कहा कि दुर्घटना और मेडिक्लेम बीमा कवर किसी भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना की स्थिति में फॉरेस्ट ट्रैकर्स और उनके परिवार के सदस्यों को बड़ी राहत प्रदान करेगा।
उन्होंने अपनी व्यक्तिगत निधि से प्रीमियम राशि दान करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के संरक्षण में फॉरेस्ट ट्रैकर्स की अहम भूमिका होती है और मानव-पशु संघर्ष के शिकार या घायल जानवरों को बचाने के दौरान उन्हें काफी जोखिम का सामना करना पड़ता है।
नथवानी ने अगले 10 वर्षों तक अपने निजी फंड या ट्रस्ट के माध्यम से ट्रैकर्स के दुर्घटना कवर और मेडिक्लेम के प्रीमियम का भुगतान करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
ट्रैकर्स के लिए आयोजित इस कार्यशाला में मुख्य वन संरक्षक राम रतन नाला, उप वन संरक्षक-गिर अग्निश्वर व्यास और उप वन संरक्षक-गिर (पश्चिम) प्रशांत तोमर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
यह भी पढ़ें-











