केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की हालिया रिपोर्ट ‘लेबर मार्केट डायनेमिक्स इन मिलियन-प्लस सिटीज’ ने गुजरात के प्रमुख शहरों की कमाई और काम के घंटों की वास्तविक तस्वीर पेश की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, अहमदाबाद में अपना व्यवसाय (स्वरोजगार) करने वाले लोग राज्य के अन्य प्रमुख शहरों के मुकाबले सबसे ज्यादा कमाई करते हैं।
हालांकि, ज्यादा घंटे काम करने के बावजूद इनकी आय अभी भी राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है। आंकड़ों के मुताबिक, अहमदाबाद में एक स्वरोजगार करने वाले व्यक्ति की औसत मासिक आय 27,438 रुपये आंकी गई है।
राज्य के अन्य शहरों की बात करें तो राजकोट में यह आंकड़ा 27,039 रुपये, सूरत में 25,658 रुपये और वडोदरा में 22,762 रुपये दर्ज किया गया है। भले ही गुजरात में अहमदाबाद सबसे ऊपर है, लेकिन 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले देश के 46 शहरों के राष्ट्रीय औसत से यह काफी कम है। इन 46 शहरों में स्वरोजगार करने वालों की औसत कमाई 30,858 रुपये है। इस सूची में 66,613 रुपये की शानदार औसत मासिक आय के साथ नवी मुंबई पूरे देश में पहले स्थान पर बना हुआ है।
मंत्रालय के ये निष्कर्ष 46 शहरों के 60,000 से अधिक लोगों पर किए गए एक व्यापक सर्वेक्षण पर आधारित हैं। इस सर्वे में अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट के लगभग 8,000 उत्तरदाता शामिल थे। वहीं, नौकरीपेशा (वेतनभोगी) वर्ग की बात करें तो गुजरात में वडोदरा ने बाजी मारी है। वडोदरा में एक वेतनभोगी कर्मचारी की औसत मासिक आय सबसे अधिक 25,342 रुपये है। इसके बाद 23,249 रुपये के साथ अहमदाबाद दूसरे, 20,548 रुपये के साथ राजकोट तीसरे और 19,460 रुपये के साथ सूरत चौथे स्थान पर है।
हैरानी की बात यह है कि गुजरात के शहरों में नौकरीपेशा लोगों की यह सबसे अधिक कमाई भी 28,808 रुपये के राष्ट्रीय औसत को नहीं छू पाई है। इस श्रेणी में भी नवी मुंबई 51,515 रुपये की औसत आय के साथ देश में सबसे आगे है। कमाई के अलावा, रिपोर्ट में काम के घंटों को लेकर भी दिलचस्प तथ्य सामने आए हैं, जो बताते हैं कि गुजरात के प्रमुख शहरों के लोग आम तौर पर राष्ट्रीय औसत की तुलना में कहीं ज्यादा समय तक काम करते हैं।
काम के घंटों के मामले में राजकोट सबसे आगे है, जहां लोगों का औसत कार्य सप्ताह 54 घंटे का है। इसके बाद अहमदाबाद में लोग हफ्ते में 52.6 घंटे, सूरत में 51.7 घंटे और वडोदरा में 44 घंटे काम करते हैं। वहीं, सभी 46 शहरों का राष्ट्रीय औसत 49.5 घंटे प्रति सप्ताह है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि राजकोट को छोड़कर बाकी सभी शहरों में वेतनभोगी कर्मचारी, स्वरोजगार करने वालों की तुलना में अधिक घंटे ड्यूटी करते हैं।
यह अंतर सबसे ज्यादा सूरत में देखा गया है, जहां नौकरीपेशा लोग अपना व्यवसाय करने वालों के मुकाबले हर हफ्ते लगभग 12 घंटे अधिक काम करते हैं। यह फर्क वडोदरा में प्रति सप्ताह लगभग दो घंटे और अहमदाबाद में करीब एक घंटे का है।
इसके अलावा, रिपोर्ट ने ‘शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण में शामिल नहीं’ (NEET) श्रेणी में एक बेहद बड़े लैंगिक अंतर को भी उजागर किया है। सर्वेक्षण में शामिल गुजरात के शहरों में जहां 4% से भी कम पुरुष इस श्रेणी में आते हैं, वहीं महिलाओं के मामले में यह आंकड़ा 40% से अधिक पाया गया है।
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