सूरत की साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे 18 वर्षीय लड़के को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया है, जिसके कारनामे सुनकर अच्छे-अच्छे हैकर्स के पसीने छूट जाएं। इस 11वीं पास युवक ने 121 फर्जी एंड्रॉयड एप्लिकेशन (APK) फाइलें बनाकर जामताड़ा के साइबर ठगों को सौंप दीं, जिनकी मदद से देशभर में 65 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया गया।
पुलिस के अनुसार, इन खतरनाक और फर्जी ऐप्स को करीब 21,672 मासूम लोगों ने अपने मोबाइल में अनजाने में डाउनलोड कर लिया था। इनमें से 2,928 लोग सीधे तौर पर साइबर धोखाधड़ी का शिकार हुए और उन्हें कुल 65 करोड़ रुपये का चूना लगा।
सबसे हैरानी की बात यह है कि इस आरोपी ने यूट्यूब वीडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स की मदद से इन एपीके फाइलों को बनाना सीखा था। इसके बाद वह हर एक फाइल को 15,000 रुपये के मासिक सब्सक्रिप्शन पर साइबर अपराधियों को बेचता था।
इस पूरे बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ तब हुआ जब सूरत के एक निवासी ने गलती से पीएनबी वन (PNB One) का फर्जी ऐप डाउनलोड कर लिया। एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस करणराज वाघेला ने बताया कि इस ऐप को इंस्टॉल करते ही पीड़ित के बैंक खाते से तुरंत 5 लाख रुपये उड़ गए।
इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की और आखिरकार इन फर्जी ऐप्स के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की।
पुलिस अधिकारी वाघेला ने जानकारी दी कि आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के कासगंज निवासी 18 वर्षीय रोहित शाक्य के रूप में हुई है। रोहित ने ही जामताड़ा गैंग को वे 121 दुर्भावनापूर्ण एपीके फाइलें बनाकर दी थीं, जिनसे 21 हजार से ज्यादा लोगों को शिकार बनाने की कोशिश की गई। पुलिस ने पूरी मुस्तैदी दिखाते हुए शाक्य को कानपुर के एक होटल से उस वक्त दबोच लिया, जब वह वहां अपनी प्रेमिका से मिलने पहुंचा था।
जांचकर्ताओं ने पाया कि ये सभी फर्जी ऐप हूबहू जानी-मानी बैंकों, सरकारी योजनाओं और लोकप्रिय ब्रांड्स के आधिकारिक ऐप जैसे ही दिखते थे, ताकि लोग आसानी से धोखे में आ जाएं। रोहित द्वारा बनाए गए 121 एपीके में पीएनबी वन, एसबीआई, एक्सिस बैंक, यूको बैंक और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसे बड़े वित्तीय संस्थानों के नाम शामिल थे। इसके अलावा उसने बिगबास्केट, डीमार्ट, पीएम-किसान, पेंशन, आरटीओ चालान, कैम्पा और कस्टमर सपोर्ट जैसे ऐप्स के भी बिल्कुल असली दिखने वाले नकली वर्जन तैयार किए थे।
पुलिस पूछताछ में यह बात सामने आई है कि शाक्य पिछले दो सालों से लगातार इस तरह की खतरनाक एपीके फाइलें तैयार कर रहा था। वह इंटरनेट पर मुफ्त में उपलब्ध यूट्यूब ट्यूटोरियल और एआई टूल्स का धड़ल्ले से इस्तेमाल करता था। इसके बाद वह इन ऐप्स को एक महीने की वैलिडिटी के साथ 15,000 रुपये प्रति एपीके के हिसाब से साइबर अपराधियों को किराये पर दे देता था, जिससे यह ठगी का काला कारोबार बिना रुके चलता रहे।
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