अमेरिका भर में डिपोर्टेशन (निर्वासन) की कार्यवाही में आई भारी तेजी का सीधा असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है। ट्रांजैक्शनल रिकॉर्ड्स एक्सेस क्लियरिंगहाउस (TRAC) द्वारा जुटाए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी इमिग्रेशन जजों ने जून 2026 में 801 भारतीयों के खिलाफ देश से निकाले जाने के आदेश जारी किए हैं।
हालांकि देश से निकाले जाने वाले भारतीयों की यह संख्या मई में दर्ज 840 मामलों की तुलना में थोड़ी कम है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर डिपोर्टेशन से जुड़े फैसलों की रफ्तार काफी तेज हो गई है। कुल निर्वासन आदेश मई के 58,339 से बढ़कर जून में 78,882 तक पहुंच गए। मात्र एक महीने में दर्ज की गई यह लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि अमेरिकी अदालतों द्वारा इमिग्रेशन मामलों के तेजी से निपटारे का स्पष्ट संकेत देती है।
ये अहम आंकड़े सूचना का अधिकार (FOIA) के तहत एग्जीक्यूटिव ऑफिस फॉर इमिग्रेशन रिव्यू (EOIR) से प्राप्त लाखों इमिग्रेशन कोर्ट रिकॉर्ड्स पर आधारित हैं। यह अमेरिकी न्याय विभाग की वह प्रमुख एजेंसी है जो इमिग्रेशन अदालतों का संचालन करती है।
TRAC ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े प्रत्येक मामले में दर्ज सबसे गंभीर निर्वासन आरोपों को दर्शाते हैं। इन्हें अंतिम कानूनी परिणाम नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि कई मामलों में अभी भी अपील या अन्य कानूनी कार्यवाही की गुंजाइश बाकी हो सकती है।
अमेरिका जाने वाले अधिकांश भारतीय प्रवासी मुख्य रूप से गुजरात और पंजाब से ताल्लुक रखते हैं और यह ताजा डेटा अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा की जा रही लगातार सख्त कार्रवाई की ओर इशारा करता है। डिपोर्टेशन की कार्यवाही सिविल प्रकृति की होती है और इसे डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी द्वारा शुरू किया जाता है।
इस लंबी प्रक्रिया में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE), कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) और यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) जैसी सुरक्षा एजेंसियां शामिल होती हैं। कानूनी प्रक्रिया की शुरुआत आमतौर पर ‘नोटिस टू अपीयर’ (उपस्थित होने के नोटिस) से होती है, जिसके बाद इमिग्रेशन जज सुनवाई करके यह तय करते हैं कि किसी व्यक्ति को देश में रहने दिया जाए या वापस भेज दिया जाए।
लैटिन अमेरिकी देशों की तुलना में भारत का आंकड़ा भले ही काफी कम है, लेकिन यह इसलिए सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है क्योंकि जून के डेटा में इतनी बड़ी संख्या में निर्वासन आदेश पाने वाला भारत एकमात्र एशियाई देश है। डिपोर्टेशन आदेशों के मामले में 15,773 मामलों के साथ मेक्सिको सबसे ऊपर है। इसके बाद इस सूची में वेनेजुएला (10,939), होंडुरास (9,686) और ग्वाटेमाला (8,340) का स्थान है।
इमिग्रेशन अदालतें मूल रूप से अमेरिकी कांग्रेस द्वारा स्थापित प्रशासनिक ट्रिब्यूनल हैं जो डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी द्वारा लाए गए डिपोर्टेशन मुकदमों पर अपना फैसला सुनाती हैं।
नवीनतम आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि जैसे-जैसे अमेरिका में विभिन्न देशों के नागरिकों के खिलाफ इमिग्रेशन कानून सख्ती से लागू हो रहा है, अदालतें भी मामलों का बेहद तेजी से निपटारा कर रही हैं। इनमें वे भारतीय भी शामिल हैं जो अमेरिका में अपने कानूनी दर्जे को लेकर अंतिम फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
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