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एयर इंडिया हादसे में बेटे की मौत के बाद, लंदन से रोज़ आने वाले एक पाकिस्तानी दोस्त के फ़ोन ने संभाला बूढ़े मां-बाप का दिल

| Updated: June 10, 2026 13:19

गुजरात के पीड़ित किसान और लंदन में रहने वाले पाकिस्तानी युवक के बीच उपजा एक ऐसा अनूठा रिश्ता, जिसने भौगोलिक और राजनीतिक सरहदों को मिटाकर इंसानियत की नई मिसाल पेश की है।

ठीक एक साल पहले, 12 जून 2025 को हुए दर्दनाक एयर इंडिया विमान हादसे ने गुजरात के सावधानभाई चौधरी के हंसते-खेलते परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दिया था। इस हादसे में उन्होंने अपने बड़े बेटे कमलेश और बहू धापूबेन को हमेशा के लिए खो दिया था। लेकिन इस गहरे दुख के बीच, पिछले 365 दिनों से सात समंदर पार लंदन से आने वाली एक आवाज़ उनके आंसुओं को पोंछने का काम कर रही है। यह कॉल किसी रिश्तेदार का नहीं, बल्कि कमलेश के पाकिस्तानी सहकर्मी उमर अली का होता है।

“कैसे हो आप… ठीक हो?” हर रोज़ दोपहर ठीक 3 बजे सावधानभाई के फोन पर यही शब्द गूंजते हैं। गुजरात के बनासकांठा जिले के थावर गांव के 48 वर्षीय किसान सावधानभाई और उनकी पत्नी रत्नीबेन के लिए उमर अली की यह रोज़ाना की कॉल अब एक बहुत बड़ा सहारा बन चुकी है। 12 जून 2025 को अहमदाबाद से गैटविक जा रहा बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई थी।

इस भयानक त्रासदी के बाद, लंदन की एक फैंसी गुड्स दुकान में कमलेश के साथ काम करने वाले 40 वर्षीय उमर अली और भारत के एक सुदूर गांव के किसान सावधानभाई के बीच एक ऐसा रिश्ता बना, जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। उमर रोज़ाना अपने काम पर जाते समय सावधानभाई को फोन करते हैं। दोनों के बीच मौसम, खेती-किसानी, दोपहर के भोजन और रोज़मर्रा की छोटी-बड़ी बातों पर लंबी चर्चा होती है।

सावधानभाई बताते हैं कि अगर उनके पैर के नाखून में भी दर्द हो, तो उमर तुरंत फोन करके हालचाल पूछता है। दूसरी तरफ, लंदन से बात करते हुए उमर कहते हैं कि ईश्वर ने कमलेश के माध्यम से इस अनूठे रिश्ते को मुमकिन बनाया है। वे बताते हैं कि सावधानभाई और उनके परिवार से बात करके और उन्हें ढाढस बंधाकर उनके अपने दिल को बेहद सुकून और तसल्ली मिलती है।

हादसे वाले दिन को याद करते हुए सावधानभाई भावुक हो जाते हैं। वे अपने बेटे और बहू को छोड़ने अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे गए थे। वहां उन्होंने अपने मोबाइल से दोनों का एक छोटा सा वीडियो बनाया था, जिसमें 26 वर्षीय धापूबेन पारंपरिक पोशाक और गुलाबी ओढ़नी में थीं, जबकि कमलेश टी-शर्ट और जींस में था। वापस लौटते समय रास्ते में उन्हें विमान के बी जे मेडिकल कॉलेज के मेस भवन पर दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर मिली थी।

कमलेश सितंबर 2022 से लंदन में रह रहा था और 22 नवंबर 2024 को शादी के लिए गांव आया था। शादी के कुछ समय बाद वह अपनी पत्नी धापूबेन को भी अपने साथ लंदन ले जा रहा था। वह अपने छोटे भाई 23 वर्षीय हितेश को भी वहां बुलाना चाहता था, जो कृषि व्यवसाय प्रबंधन में मास्टर की पढ़ाई कर रहा है। कमलेश के मामा देवकरण चौधरी बताते हैं कि अब तो हवाई यात्रा के बारे में सोचने भर से पूरा परिवार कांप उठता है।

इस साल 6 जनवरी को, सावधानभाई को एयर इंडिया के फैमिली रिटर्न्स सेंटर से बच्चों का कुछ बचा हुआ सामान मिला। इनमें कमलेश की जली हुई शादी की एल्बम के अंश, एक डेस्कटॉप कैलेंडर, पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी और मैरिज सर्टिफिकेट शामिल थे। रत्नीबेन को बहू की पायल, कान की बाली, एक सोने का लॉकेट, दो कलश और भगवान शिव की नक्काशी वाला चांदी का सिक्का भी वापस मिला था, जिन्हें वे अपनी सबसे बड़ी अमानत मानते हैं।

इस सिलसिले की शुरुआत तब हुई जब लंदन में कमलेश के मालिक और अफगान सिख अंगत सिंह उर्फ ‘तन्नीभाई’ ने उमर अली को सावधानभाई का नंबर देकर उनका हालचाल पूछने को कहा था। उमर ने कमलेश के रूममेट दीक्षित पटेल से नंबर लिया और तब से यह बातचीत कभी नहीं रुकी। खुद उमर ने भी साल 2022 और 2023 के बीच अपने पिता, भाई और मां को खोया था, इसलिए वे इस परिवार के दर्द को बखूबी समझते हैं।

शुरुआत में सावधानभाई गुजराती और हिंदी के घालमेल के कारण खुलकर बात नहीं कर पाते थे, लेकिन अब दोनों वीडियो कॉल पर एक-दूसरे से तस्वीरें साझा करते हैं। सावधानभाई अपने खेतों में उगी तरबूज, मिर्च और भिंडी की तस्वीरें भेजते हैं, तो उमर अपने परिवार और लंदन की ज़िंदगी की झलकियां दिखाते हैं। जब उमर ने पहली बार अपनी दाढ़ी कटवाई, तो उन्होंने वीडियो कॉल पर सावधानभाई से आशीर्वाद भी लिया।

सावधानभाई अब अपने जीवन को उसी तरह जी रहे हैं जैसा उनका बेटा चाहता था। कमलेश ने दिवाली पर कार खरीदने का वादा किया था, जिसे परिवार ने मुआवजे की रकम से पूरा किया।

सावधानभाई को अंतरिम राहत के रूप में 25 लाख रुपये, टाटा ट्रस्ट से 1 करोड़ रुपये और गुजरात मुख्यमंत्री राहत कोष से 4 लाख रुपये मिले। इस रकम से उन्होंने कमलेश को लंदन भेजने के लिए दोस्तों से लिया 55 लाख रुपये का कर्ज चुकाया और अपनी 10 बीघा जमीन पर नई फसलें उगाना शुरू किया।

हाल ही में सावधानभाई ने उमर के परिवार के लिए 10 किलो का एक पार्सल भेजा, जिसमें शुद्ध घी, पाचक चूर्ण और उमर की पत्नी समीना के लिए ड्राई कचोरी शामिल थी। वहीं, उमर ने भी कमलेश के भाई के लिए ब्लेज़र और मां के लिए स्वेटर भेजा है। उमर से जुड़े रहने के लिए 11वीं पास सावधानभाई अब गुजराती मैसेजेस को अनुवाद करके अंग्रेजी में भेजना भी सीख गए हैं।

कमलेश के मालिक तन्नीभाई भी पिछले 12 महीनों से हर महीने सावधानभाई के खाते में 50,000 रुपये भेज रहे हैं और उन्होंने दोस्तों की मदद से 2,800 पाउंड का एक अलग फंड भी जुटाया है। हादसे की पहली बरसी पर यह परिवार अहमदाबाद में क्रैश साइट पर जाने की योजना बना रहा है।

उमर ने सावधानभाई के व्हाट्सएप स्टेटस के लिए कमलेश और धापूबेन की यादों का एक भावुक वीडियो भी बनाकर भेजा है, जो इस बात का सबूत है कि इंसानियत और मोहब्बत के आगे सरहदें कितनी छोटी पड़ जाती हैं।

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