अहमदाबाद: गुजरात के जंगलों में अपना जीवन बिता रहे इकलौते नर बाघ का अकेलापन जल्द ही दूर होने वाला है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल की बारिश खत्म होने के बाद उसे एक संगिनी मिल जाएगी। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने राज्य सरकार से रतनमहल क्षेत्र के लिए एक विस्तृत आवास मूल्यांकन रिपोर्ट मांगी है। पिछले साल फरवरी से यह नर बाघ इसी इलाके में अपना डेरा जमाए हुए है। राज्य में बाघों की एक स्थायी आबादी स्थापित करने की दिशा में यह एक बेहद अहम कदम है।
वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, इस मूल्यांकन की तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं। मानसून के विदा होते ही इस प्रक्रिया को पूरी तरह से संपन्न कर लिया जाएगा। एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि एनटीसीए ने सख्त निर्देश दिए हैं कि बाघिन को केवल रिपोर्ट सौंपने और उसे मंजूरी मिलने के बाद ही यहां लाया जाएगा। इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट में शिकार के लिए जानवरों की सघनता का सटीक अनुमान होना बेहद जरूरी है।
इस नर बाघ ने देवगढ़ बारिया, छोटा उदेपुर, डोलरिया, सगताला और सूखी डैम क्षेत्र में लगभग 120 वर्ग किलोमीटर का अपना एक मजबूत इलाका बना लिया है। यह पूरा क्षेत्र रतनमहल लैंडस्केप के 25 किलोमीटर के दायरे में आता है। पिछले एक साल से इस बाघ की हर गतिविधि पर करीब से नज़र रख रहे अधिकारियों ने इसके सफल शिकार के कई प्रमाण जुटाए हैं। इन बातों से यह साफ हो गया है कि यह बाघ इस नए माहौल में पूरी तरह से ढल चुका है।
एनटीसीए के अंतिम फैसले से पहले होने वाले इस मूल्यांकन में कई अहम पहलुओं की बारीकी से जांच होगी। इसमें शिकार की उपलब्धता, बाघों के लिए माहौल की अनुकूलता, पानी के संसाधन, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और मानव-वन्यजीव संघर्ष के संभावित जोखिम का अध्ययन किया जाएगा। प्राधिकरण ने फरवरी में हुई एक अहम बैठक के दौरान राष्ट्रीय बाघ गणना पूरी होने के बाद सैद्धांतिक रूप से यहां बाघिन भेजने पर सहमति जताई थी। साथ ही, गुजरात में बाघों की गिनती के काम को भी हरी झंडी दे दी थी।
किसी भी जंगली जानवर को नई जगह पर बसाने से पहले आमतौर पर आवास मूल्यांकन की यह रिपोर्ट सबसे आखिरी और जरूरी शर्त होती है। भारत में बाघों के प्रजनन का समय नवंबर से अप्रैल के बीच होता है। ऐसे में विभाग की कोशिश है कि अगले प्रजनन काल के शुरू होने से काफी पहले बाघिन को यहां लाकर अच्छी तरह से बसा दिया जाए, ताकि वह अपने नए घर की अभ्यस्त हो सके।
योजना के मुताबिक, बाघिन को एयरलिफ्ट करके सीधे नर बाघ के मौजूदा इलाके के करीब ही छोड़ा जाएगा। सूत्रों की मानें तो इसके लिए ऐसी बाघिन को प्राथमिकता दी जाएगी जो या तो अपने मूल इलाके से भटक गई हो या फिर किसी साथी की तलाश में घूम रही हो। अगर ऐसी बाघिन नहीं मिलती है, तो कड़ी जांच के बाद जंगल से पकड़ी गई किसी दूसरी बाघिन पर भी विचार किया जा सकता है। चुनी गई बाघिन को यहां लाने से पहले उसके स्वास्थ्य और व्यवहार की हर स्तर पर जांच की जाएगी।
अधिकारी इस बात को लेकर भी पूरी तरह सतर्क हैं कि चुनी गई बाघिन का इंसानों या पालतू जानवरों पर हमले का कोई पुराना इतिहास न हो। जंगल में छोड़े जाने के बाद उस पर लगातार नजर रखने के लिए उसे एक रेडियो कॉलर भी पहनाया जाएगा। अगर यह योजना सफल होती है, तो गुजरात के लिए यह एक आत्मनिर्भर और स्थायी बाघ आबादी विकसित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत होगी।
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