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“मैंने अपनी तस्वीर का एक स्क्रीनशॉट देखा, जिसमें लिखा था कि मैं ‘दिन की बुल्ली बाई’ हूं” – महिला पत्रकार

| Updated: January 4, 2022 3:17 pm

पत्रकारों से लेकर पायलट तक कांग्रेस नेता से लेकर जेएनयू के लापता छात्र की मां तक – ये उन 100 से अधिक मुस्लिम महिलाओं में से हैं, जिन्होंने एक वेबसाइट पर अपना नाम पाया है, वेबसाइट पर बिना सहमति के उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया, साथ ही उनके फोटो के साथ अपमानजनक शब्दों में लिखा गया था कि इन्हें नीलाम किया जा रहा है।

यह मामला समान रूप से पहले के इसी तरह की एक और वेबसाइट के बमुश्किल छह महीने बाद सामने आया है, यह वेबसाइट भी सॉफ्टवेयर विकास के लिए इंटरनेट होस्टिंग प्रदाता, गिटहब का उपयोग कर रहा है। इस मामले में दिल्ली, नोएडा या गुड़गांव में पुलिस ने अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की है। 

टारगेट की गई महिलाओं में से कुछ ने पिछली बार पर्याप्त कानूनी कार्यवाई नहीं होने पर निराशा व्यक्त की। उनका मानना है कि, इसी वजह से अपराधियों ने बेखौफ यह कारनामा जारी रखा।

एक पत्रकार, जिसकी शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है, ने कहा: “यह 1 जनवरी था। मैंने अपने एक दोस्त द्वारा भेजे गए व्हाट्सएप पर एक संदेश खोला और एक फोटो पर ‘डाउनलोड’  के लिए क्लिक किया, यह मानते हुए कि यह एक ‘हैप्पी न्यू ईयर’ संदेश होगा। इसके बजाय, मैंने अपनी तस्वीर का एक स्क्रीनशॉट देखा, जिसमें लिखा था कि मैं ‘दिन की बुल्ली बाई’ हूं। मैं सदमे में बिस्तर से कूद गई। यह आश्चर्य की बात नहीं थी क्योंकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। लेकिन हम सब पिछले एक साल में बहुत कुछ झेल चुके हैं, हम दूसरी लहर के आघात से मुश्किल से ही उबर पा रहे हैं। मैं वास्तव में वर्ष की शुरुआत एक नए आशा और उम्मीद के साथ करना चाहती थी। यह सोचकर हैरानी हुई कि कोई वर्ष के अंतिम दिन हमें नीचा दिखाने और ऐसा करने के लिए बैठा था।”

उसने कहा कि वह इसे नजरअंदाज नहीं कर सकती है और कार्रवाई करने के लिए मजबूर महसूस करती है, खासकर क्योंकि यह एक दोहराव अपराध है: “सबसे चिंताजनक बात यह है कि पिछली बार कई एफआईआर दर्ज की गई थीं, इसके बारे में संसद में बात की गई थी, महिला आयोग ने संज्ञान लिया था इसके बारे में, लेकिन कोई रचनात्मक निष्कर्ष नहीं निकला। ”

पांच साल से अधिक समय से लापता जेएनयू की एक छात्रा की मां को फोन आए और कहा कि वह भी वेबसाइट पर सूचीबद्ध है। उसने कहा कि वह इसे नजरअंदाज कर रही हैं। “इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। ये लोग घटिया और नीच हरकत करके लोकप्रिय बनाना चाहते हैं। मैं सिर्फ एक मां हूं जो अपने बच्चे को न्याय दिलाने की कोशिश कर रही है। जो लोग अपनी मां का सम्मान करते हैं, वे ऐसा कभी नहीं कर सकते।”

जिन महिलाओं को पहले मामले में सूचीबद्ध किया गया था और पुलिस से संपर्क किया था, उन्होंने भी खुद को नई वेबसाइट में सूचीबद्ध पाया है। उनमें से एक, कांग्रेसी नेता ने कहा: “मैं स्तब्ध थी… यह सब फिर से हो रहा था। ये अनजान आदमी हमारे फोटो पर बोली लगाते हैं, हमें नीलाम करते हैं और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं… मैंने मई में भी शिकायत दर्ज कराई थी जब पुरुषों का एक समूह YouTube पर हमारी तस्वीरें पोस्ट कर रहा था और ‘मनोरंजन’ जारी रखने के लिए अन्य पुरुषों से पैसे मांग रहा था। मैं इससे आहात थी, और फिर मैंने (पहले के GitHub मामले) के लिए एक प्राथमिकी दर्ज की; मैंने दिल्ली पुलिस को सारे सबूत मुहैया कराए, लेकिन उन्होंने कभी मेरी मदद नहीं की।”

एक अन्य पत्रकार ने भी पाया कि उसे निशाना बनाया गया था। वह शिकायत दर्ज कराने पर काम कर रही हैं। “सूची में सभी महिलाओं को एकजुट करने वाली एकमात्र चीज यह है कि वे सभी मुस्लिम हैं और वे सभी मुखर रही हैं। ज्यादातर पत्रकार सिर्फ अपना काम कर रहे हैं, कुछ कार्यकर्ता हैं, और कुछ नाबालिग भी हैं जो सिर्फ सोशल मीडिया पर अपनी आवाज उठा रहे हैं। यहां एक संदेश है, ‘हम आपके साथ ऐसा करने के लिए पर्याप्त हैं और हम इसे फिर से कर सकते हैं”, उसने कहा।

उसने कहा कि वह इस बात को लेकर परेशान थी कि इस अनुभव को अपने परिवार के साथ कैसे साझा किया जाए और क्या उसे इसके बारे में सार्वजनिक करना चाहिए।

“मेरा परिवार मेरी दादी के हालिया निधन से दुखी है। हालाँकि मुझे 31 दिसंबर को पता चला कि मुझे निशाना बनाया गया था, मैंने केवल अपने माता-पिता को इसके बारे में बताया और उनसे पूछा कि मुझे क्या करना चाहिए। उन्होंने इसे मेरी अपेक्षा से बहुत बेहतर तरीके से संभाला और मुझसे कहा कि वे शिकायत के साथ आगे बढ़ने में मेरा समर्थन करेंगे। सच कहूं, तो उन्हें आश्चर्य नहीं हुआ, हमने देखा है कि मुस्लिम महिला पत्रकारों का उत्पीड़न किया जाता है,” उसने कहा।

एक पायलट, जिसने पिछले मामले के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस में प्राथमिकी दर्ज की थी, ने कहा: “मैं आशान्वित थी और सोचा था कि मुझे न्याय मिलेगा लेकिन यूपी पुलिस ने कभी मुझे पूछताछ के लिए भी नहीं बुलाया। मैंने कई बार जांच अधिकारी को फोन किया लेकिन सब बेकार रहा। पुरुषों ने अब एक और पेज बनाया है। जब मैंने स्क्रीनशॉट देखा, तो मैं चौंक गई और रोना आ गया… वे ऐसा करते रहेंगे क्योंकि वे हमारी आवाज़ को चुप कराना चाहते हैं और सरकार कुछ नहीं कर रही है। अब मुझे कमजोरी महसूस हो रही है। मैं काम पर नहीं जाना चाहती और मैं सो नहीं पा रही हूं। मैं सोचती रहती हूं कि उन्होंने मेरी फोटो का इस्तेमाल क्यों किया। मैं कभी भी राजनीतिक नहीं होती और न ही किसी बहस या लड़ाई में शामिल होती हूं।”

एक अन्य पत्रकार ने कहा कि एक दोस्त जिसकी तस्वीर का भी दुरुपयोग किया गया था, ने दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज की और दूसरे ने पिछली बार गुड़गांव पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। “हममें से किसी को भी पूछताछ या किसी अपडेट के लिए नहीं बुलाया गया था। गुड़गांव पुलिस ने कभी उससे संपर्क नहीं किया… यह बहुत तनावपूर्ण है और मुझे डर लग रहा है। अगर उन्हें अभी नहीं रोका गया तो पुरुष फिर से ऐसा करेंगे।”

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