” अग्निपथ ” से जला दिल्ली ,यूपी बिहार , वरुण गांधी ने भी लिखा पत्र

| Updated: June 16, 2022 5:18 pm

सेना में भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना का बिहार और देश के अलग- अलग सूबों में बड़े स्तर पर लगातार दूसरे दिन विरोध हुआ। बिहार में छात्रों ने इस योजना का विरोध करते हुए जहानाबाद में जमकर बवाल किया । छात्रों ने पुलिस पर पथराव के साथ सड़क पर आगजनी कर अपना विरोध दर्ज कराया। इस प्रदर्शन में एसपीडीओं बाल-बाल बच गए। इसके साथ बिहार के आरा, छपरा, बक्सर और नवादा में भी छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। दिल्ली , उत्तरप्रदेश और बिहार में उग्र विरोध प्रदर्शन , आगजनी और पथराव की घटनाएं सामने आयी हैं।

बक्सर में छात्रों ने देश के सबसे मुख्य रेल मार्गों में से एक दिल्ली- हावड़ा रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया है। जानकरी के मुताबिक करीब 100 से अधिक युवा बक्सर में रेलवे ट्रैक पर बैठे हुए हैं। इससे मार्ग पर चलने वाली कई मुख्य ट्रेनें भी प्रभावित हुई है। छपरा में भी छात्रों ने टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया।


सेना में भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना का बिहार और देश के अलग- अलग सूबों में बड़े स्तर पर लगातार दूसरे दिन विरोध हुआ। बिहार में छात्रों ने इस योजना का विरोध करते हुए जहानाबाद में जमकर बवाल किया। छात्रों ने पुलिस पर पथराव के साथ सड़क पर आगजनी कर अपना विरोध दर्ज कराया। इस प्रदर्शन में एसपीडीओं बाल-बाल बच गए। इसके साथ बिहार के आरा, छपरा, बक्सर और नवादा में भी छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया।

छात्रों ने देश के सबसे मुख्य रेल मार्गों में से एक दिल्ली- हावड़ा रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया है। जानकरी के मुताबिक करीब 100 से अधिक युवा बक्सर में रेलवे ट्रैक पर बैठे हुए हैं। इससे मार्ग पर चलने वाली कई मुख्य ट्रेनें भी प्रभावित हुई है। छपरा में भी छात्रों ने टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया।
कल भी बिहार और राजस्थान कई शहरों में इस योजना के खिलाफ प्रदर्शन देखने को मिले थे।

बुधवार को रजस्थान में छात्रों ने दिल्ली- अजमेर हवाई को जाम कर दिया था। करधनी थानाधिकारी बनवारी लाल ने बताया कि दोपहर में करीब 150-200 युवाओं ने अजमेर-दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे पर अगनिपथ योजना के साथ सेना में लंबित भर्ती, सेना में भर्ती के लिये लिखित परीक्षा आयोजित नहीं करने संबंधी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। युवाओं के विरोध के कारण हाईवे पर पांच किलोमीटर लंबा जाम लग गया था।

क्या है अग्निपथ योजना?: सेना में युवाओं की भर्ती के उद्देश्य अग्निपथ योजना लॉन्च की गई है। इस योजना के जरिए सेना हर साल करीब 45 हजार युवाओं को चार साल के भर्ती करेगी। ये युवा 17.5 साल से लेकर 21 साल के बीच में होंगे। चार साल पूरे होने के बाद इनमें से 25 फीसदी युवाओं स्थायी काडर में भर्ती किया जाएगा और बाकी को सेना से रिटायर कर दिया जाएगा।

वरुण गांधी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा

देशभर में सरकार के ‘अग्निपथ’ योजना को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच भाजपा नेता वरुण गांधी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर उनसे योजना से जुड़े नीतिगत तथ्यों को सामने रख कर अपना पक्ष साफ करने की मांग की है। पत्र में लिखा कि योजना को लेकर लोगों खासकर युवाओं के मन में कई तरह के भ्रम हैं। उन्हें अपना भविष्य अंधकार में जाता दिख रहा है। ऐसे में इस पर सरकार अपनी स्थिति साफ करें ताकि लोगों का गुस्सा खत्म हो सके। पत्र में वरुण गांधी ने लिखा ‘अग्निपथ’ योजना पर सरकार की स्थिति साफ होने से देश की युवा ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग सही दिशा में हो सकेगा।

भाजपा सांसद वरुण गांधी ने पत्र में लिखा कि सेना में 15 साल की नौकरी के बाद रिटायर हुए नियमित सैनिकों को कारपोरेट सेक्टर नियुक्त करने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाते। ऐसे में 4 साल की अल्पावधि के उपरांत इन अग्निवीरों का क्या होगा। चार साल सेना में सेवा देने के दौरान इन युवकों की पढ़ाई बाधित होगी। साथ ही साथ अन्य समकक्ष छात्रों की तुलना में ज्यादा उम्रदराज होने के कारण अन्य संस्थानों में शिक्षा ग्रहण करने व नौकरी पाने में मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।”

उनका मानना है कि “किसान परिवार, निम्न व मध्यम वर्ग से आने वाले इन अग्निवीरों को सरकार द्वारा निर्धारित कम वेतनमान के कारण घर चलाने में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।” उन्होंने लिखा, “स्पेशल आपरेशन के समय सशस्त्र बलों में स्पेशलिस्ट कॉडर वाले सैनिकों की आवश्यकता होती है, ऐसे में महज 6 महीने की बेसिक ट्रेनिंग प्राप्त इन सैनिकों के कारण वर्षों पुरानी रेजिमेंटल संरचना बाधित हो सकती है। इस योजना से प्रशिक्षण लागत की बर्बादी भी होगी, क्योंकि 4 साल के उपरांत सेना इन प्रशिक्षित जवानों में केवल 25 प्रतिशत का ही उपयोग करेगी। जो रक्षा बजट पर अनावश्यक बोझ साबित होगा।”

सांसद के मुताबिक “इस योजना के लागू होने के पश्चात हर वर्ष भर्ती किए गए युवाओं में से 75 प्रतिशत चार वर्षों के बाद पुन: बेरोजगार होंगे। हर साल यह संख्या बढ़ती जाएगी। इससे देश के युवाओं में असंतोष और अधिक पनपेगा।” वरुण गांधी ने कहा कि “हमें उन युवाओं के बारे में भी सोचना होगा, जिनकी उम्र सीमा कोरोना एवं भर्ती सही समय पर नहीं होने के कारण पार कर गई है।

अखिलेश यादव ने साधा निशाना

दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सैन्य बलों में भर्ती की नई योजना ‘अग्निपथ’ को लेकर केंद्र सरकार पर गुरुवार को निशाना साधते हुए कहा कि यह देश और देश के युवाओं के भविष्य के लिए घातक साबित होगी। यादव ने ट्वीट किया, “देश की सुरक्षा कोई अल्पकालिक या अनौपचारिक विषय नहीं है, ये अति गंभीर व दीर्घकालिक नीति की अपेक्षा करती है। सैन्य भर्ती को लेकर जो ख़ानापूर्ति करने वाला लापरवाही भरा रवैया अपनाया जा रहा है, वह देश और देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए घातक साबित होगा। ‘अग्निपथ’ से पथ पर अग्नि न हो।”

गौरतलब है कि केंद्र की इस नई योजना के तहत थलसेना, नौसेना और वायुसेना में इस साल करीब 46,000 सैनिक भर्ती किए जाएंगे। चयन के लिए पात्रता आयु साढ़े 17 वर्ष से 21 वर्ष के बीच होगी और इन्हें ‘अग्निवीर’ नाम दिया जाएगा।

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