इतिहास में पहली बारः दवा के परीक्षण में गायब हो गया हर मरीज का कैंसर

| Updated: June 8, 2022 11:07 am

मलाशय के कैंसर (रैक्टल कैंसर) से पीड़ित लोगों के एक छोटे समूह ने इतिहास में पहली बार कुछ बड़े चमत्कार का अनुभव किया है। उनका कैंसर इलाज के सिलसिले में किए गए एक प्रयोग के बाद गायब हो गया। यह जानकारी न्यूयॉर्क टाइम्स ने दी है। उसके अनुसार, एक बहुत ही छोटे क्लीनिकल ट्रायल में 18 रोगियों ने लगभग छह महीने तक डोस्टारलिमैब नामक दवा ली। और, अंत में उनमें से प्रत्येक ने अपने ट्यूमर को गायब होते देखा।

डोस्टारलिमैब दरअसल लैब में बनी मॉलिक्‍यूल वाली एक दवा है, जो मानव शरीर में स्थानापन्न (सबस्‍टीट्यूट) एंटीबॉडी के रूप में कार्य करती है। सभी 18 रेक्टल कैंसर रोगियों को एक ही दवा दी गई थी। इस इलाज से हर रोगी में कैंसर पूरी तरह से समाप्त हो गया। किसी में भी शारीरिक परीक्षण, एंडोस्‍कोपी, पॉजिट्रान एमीशन टोमाग्राफी या पेट स्‍कैन या एमआरआई स्‍कैन  में इसके लक्षण नहीं दिखे। न्‍यूयॉर्क के मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर के डॉ. लुइस ए डियाज जे ने कहा है कि कैंसर के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, क्‍लीनिकल ट्रायल में शामिल रोगियों को अपने कैंसर को मिटाने के लिए पहले इलाज के कठिन चरणों का सामना करना पड़ा था। जैसे कि कीमोथेरेपी, विकिरण (रेडिएशन) और गहन सर्जरी। इसके परिणामस्वरूप आंत, मूत्र और यहां तक कि यौन रोग भी हो सकते हैं। अगले चरण के रूप में इनसे गुजरने की उम्मीद में 18 मरीज क्लीनिकल ट्रायल में शामिल हुए। चकित कर देने वाली बात यह रही कि अब आगे उन्‍हें किसी इलाज की जरूरत नहीं रह गई है।

नतीजे अब चिकित्सा जगत में चर्चित हो रहे हैं। चारों तरफ हलचल पैदा कर रहे हैं। मीडिया से बात करते हुए कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में कोलोरेक्टल कैंसर विशेषज्ञ डॉ. एलन पी. वेनुक ने कहा कि हर रोगी का पूरी तरह से ठीक होना अभी तक “अनसुना” है। उन्होंने इस रिसर्च को विश्व में पहली बार होना बताया। कहा कि यह विशेष रूप से प्रभावशाली था, क्योंकि किसी भी रोगी को परीक्षण वाली दवा से कठिन जटिलताओं का सामना नहीं करना पड़ा।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर  और पेपर के सह-लेखक ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ एंड्रिया सेर्सेक ने उस क्षण का वर्णन किया जब रोगियों को पता चला कि वे कैंसर मुक्त हो गए। वे खुशी से रो रहे थे।

बता दें कि क्लीनिकल ट्रायल के दौरान रोगियों ने छह महीने तक हर तीन सप्ताह में डोस्टारलिमैब लिया। उन सभी कैंसर का समान स्टेज था। उनमें मलाशय में कैंसर था, जो शरीर  के अन्य अंगों तक नहीं फैला था। अब दवा की समीक्षा करने वाले कैंसर शोधकर्ताओं ने बताया कि परीक्षण के नतीजे हैरान करने वाला लग रहा है। लेकिन यह देखने के लिए बड़े पैमाने पर परीक्षण की जरूरत है कि क्या यह अधिक रोगियों के लिए काम करेगा और क्या वास्तव में कैंसर हार गया है।

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