ममता बनर्जी ने पार्थ चटर्जी को क्यों छोड़ा, 10 बिंदुओं से समझें

| Updated: July 29, 2022 8:07 pm

बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के घर से जब्त किए गए नकदी के ढेर की तस्वीरों का आम लोगों और राज्य की राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। जब अर्पिता मुखर्जी के घर के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर उनके मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बनने लगा था।

विपक्ष ने पार्थ चटर्जी को बर्खास्त करने की मांग शुरू कर दी। शुरू में अपने मंत्री के साथ खड़े होने के बावजूद ममता बनर्जी ने जल्द ही दागी मंत्री से पल्ला झाड़ लिया। चटर्जी को जाना ही पड़ा।

पल्ला झाड़ लेने के ये हैं 10 कारण:

1.मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जल्द ही महसूस किया कि यह खुलासा उनकी ईमानदार, भ्रष्टाचार मुक्त छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्हें फैसला करना था।

2. निलंबित मंत्री के खिलाफ कार्रवाई में समय लगा, क्योंकि कई प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने बड़ी सावधानी से पार्थ चटर्जी को उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त किया। सबसे पहले उन्होंने चटर्जी का सरकारी वाहन छीन लिया। फिर उन्होंने उन्हें तृणमूल कांग्रेस के मुखपत्र जागो बांग्ला के संपादक के पद से हटाया। इसके बाद उनका मंत्री  पद गया और अब उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया है।

3. शिक्षक भर्ती घोटाले पर राज्य सरकार को तत्काल ध्यान देने की जरूरत थी।

4. पार्थ चटर्जी पार्टी की राज्य इकाई के महासचिव और पार्टी की अनुशासन समिति के सदस्य भी थे। उनके खिलाफ आलाकमान की निष्क्रियता पार्टी के जिला स्तरीय कार्यकर्ताओं को भ्रमित करती।

5. ममता बनर्जी अब शायद कैबिनेट में फेरबदल और पार्टी में बदलाव का विकल्प चुनेंगी। पार्थ चटर्जी के निष्कासन ने वह अवसर दे दिया है।

6. अभिनेता और भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने दावा किया कि तीन दर्जन से अधिक टीएमसी विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। उन्होंने पूर्वी राज्य में महाराष्ट्र जैसे तख्तापलट की चेतावनी दी थी। इस घोटाले ने भाजपा को एक बार फिर टीएमसी को तोड़ने के लिए आक्रामक तरीके से काम करने का मौका दिया है। पार्थ को अलग-थलग करने से ऐसी मुहिम पर लगाम लगने की संभावना है।

7. मुख्यमंत्री एक स्पष्ट संदेश देना चाहती थीं: उन्हें इस घोटाले के बारे में कुछ भी नहीं पता था। वह पाक-साफ रहना चाहती हैं।

8. पार्टी नेतृत्व पार्थ चटर्जी की सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के सरकारी गवाह यानी तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ जांच एजेंसी का गवाह बनने से भी चिंतित था। इसलिए, उनसे अलग होना बेहतर विकल्प लगा।

9. ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक शुरू से ही इस मामले को लेकर काफी मुखर रहे हैं। इसने मुख्यमंत्री पर दबाव बनाया।

10 .भविष्य में अन्य मंत्रियों के भी घोटाले में फंसने की आशंका है। ऐसे में आनन-फानन वाली यह कार्रवाई आगे नजीर का काम करेगी- दोषी साबित होने वाले किसी भी व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ेगा।

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