comScore अमेरिका का नया टैरिफ नियम लागू: भारतीय रत्न एवं आभूषणों पर बरकरार रहेगा 10% शुल्क, निर्यात को लगेगा झटका - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

अमेरिका का नया टैरिफ नियम लागू: भारतीय रत्न एवं आभूषणों पर बरकरार रहेगा 10% शुल्क, निर्यात को लगेगा झटका

| Updated: July 27, 2026 12:50

अमेरिका के नए 'सेक्शन 301' टैरिफ नियम से आभूषण निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ीं, हालांकि चीन और यूएई जैसे अन्य प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले भारत को 2.5 प्रतिशत की मामूली राहत मिली है।

अमेरिका द्वारा 24 जुलाई को लागू की गई नई ‘सेक्शन 301’ टैरिफ व्यवस्था के बाद, भारतीय रत्न और आभूषण निर्यातकों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ता रहेगा। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में भारत को मामूली बढ़त मिलने के बावजूद, इस अमेरिकी कदम से भारतीय निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ना तय है।

रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने इस कर को पूरी तरह से अनुचित करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए नियम के तहत लगने वाला यह 10 प्रतिशत शुल्क भारत के आभूषण निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

भंसाली के अनुसार, हालांकि निचले टैरिफ स्लैब में होने के कारण भारत को आभूषणों के मामले में थोड़ी प्रतिस्पर्धात्मक राहत मिली है, लेकिन प्राकृतिक हीरे और रंगीन रत्नों के लिए शुल्क में छूट प्राप्त करना अभी भी उनका मुख्य लक्ष्य है। इसके लिए वे जल्द ही भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के माध्यम से टैरिफ अंतर को पाटने की उम्मीद कर रहे हैं।

गौरतलब है कि यह नई नीति पिछली अस्थायी ‘सेक्शन 122 बैलेंस-ऑफ-पेमेंट्स सरचार्ज’ का स्थान लेगी। यह बड़ा बदलाव संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) कार्यालय की एक विस्तृत जांच के बाद किया गया है। इस जांच के तहत दुनिया भर की 60 अर्थव्यवस्थाओं में जबरन मजदूरी से तैयार होने वाले उत्पादों के आयात पर लगे प्रतिबंधों के कार्यान्वयन और सख्ती का गहराई से आकलन किया गया था।

परिषद ने बताया कि जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर कड़ाई से रोक लगाने के कारण ही भारत को 10 प्रतिशत वाले निचले टैरिफ स्लैब में रखा गया है। दूसरी ओर, चीन, हांगकांग, थाईलैंड, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इजरायल और वियतनाम जैसे अन्य प्रमुख विनिर्माण और व्यापारिक केंद्रों पर अब 12.5 प्रतिशत का भारी अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। इस प्रकार, अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों को अपने इन प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले 2.5 प्रतिशत अंक का सीधा फायदा मिलेगा।

भंसाली ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का आभूषण उद्योग हमेशा से ही नैतिक व्यापारिक प्रथाओं और जिम्मेदारीपूर्ण सोर्सिंग का पूरी तरह पालन करता आ रहा है। कुछ प्रतिस्पर्धी देशों पर बढ़त मिलने के बावजूद, परिषद का कहना है कि बेल्जियम की तुलना में भारतीय निर्यातक अभी भी काफी बड़े नुकसान की स्थिति में हैं।

इसके अलावा, अमेरिका में आभूषणों के निर्यात पर मौजूदा ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ (MFN) ड्यूटी 5.5 प्रतिशत से 6 प्रतिशत तक जारी रहेगी। इस मौजूदा ड्यूटी के साथ जब नए 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क को जोड़ा जाएगा, तो कुल प्रभावी आयात शुल्क लगभग 15.5 प्रतिशत से 16 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।

यह भी पढ़ें-

नीट परीक्षा: मेडिकल में अंग्रेजी का दबदबा, गुजराती माध्यम से परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट

भारी विरोध और पुलिस लाठीचार्ज के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, कहा- ‘राष्ट्रीय एकता के लिए छोड़ा प…

Your email address will not be published. Required fields are marked *