गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) ने हाल ही में दो नए एमबीए प्रोग्राम शुरू किए हैं। पहला पाठ्यक्रम फॉरेंसिक अकाउंटिंग और फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन में है, जबकि दूसरा फिनटेक फॉरेंसिक्स से जुड़ा है। इन दोनों कोर्सेज की कुल 80 सीटों के लिए विश्वविद्यालय को 1,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसका सीधा मतलब है कि एक सीट के लिए लगभग 13 उम्मीदवार कतार में हैं। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, किसी गैर-तकनीकी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए इस साल यह सबसे अधिक आवेदन दरों में से एक है।
वित्तीय अपराधों के बढ़ते स्तर और उनके जटिल होने के कारण गुजरात में फॉरेंसिक अकाउंटिंग पढ़ने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यह क्रेज सिर्फ NFSU तक ही सीमित नहीं है। वडोदरा की पारुल यूनिवर्सिटी ने भी इसी साल से फॉरेंसिक अकाउंटिंग और कॉरपोरेट फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन में एमबीए की शुरुआत की है। इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों से चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए भी फॉरेंसिक अकाउंटिंग के मॉड्यूल को समझना अनिवार्य कर दिया गया है।
NFSU के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के डीन प्रोफेसर हरेश बारोट इस रुझान को धोखाधड़ी के बदलते तरीकों से जोड़कर देखते हैं। उनका कहना है कि यह तकनीक के इस्तेमाल से होने वाले वित्तीय अपराधों और फ्रॉड में लगातार हो रही बढ़ोतरी का सीधा नतीजा है। प्रोफेसर बारोट के मुताबिक पारंपरिक अकाउंटिंग के अलावा अब जांचकर्ताओं को वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी को पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स के इस्तेमाल की खास ट्रेनिंग दी जा रही है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले दो वर्षों में राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के लिए शॉर्ट-टर्म ट्रेनिंग कोर्सेज की मांग में भी भारी उछाल आया है। अपराध के तरीके और उपकरण बदल चुके हैं, इसलिए शिक्षा जगत को भी इस विकसित होती तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा।
इन नए कोर्सेज की बढ़ती मांग के पीछे के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, साल 2025-26 में वित्तीय धोखाधड़ी का आंकड़ा 48,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो 2024-25 में 32,800 करोड़ रुपये था। साइबर फ्रॉड से होने वाला नुकसान भी लगातार बढ़ रहा है। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में भारतीयों ने अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय गिरोहों के स्कैम में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम गंवाई है।
विश्वविद्यालयों के लिए इन आंकड़ों का मतलब नए पाठ्यक्रम शुरू करने और इंडस्ट्री के साथ बेहतर तालमेल बनाने से है। खासकर ऐसे समय में जब गुजरात ‘गिफ्ट सिटी’ (GIFT City) जैसी शानदार पहलों के साथ अपने फिनटेक सेक्टर का विस्तार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कोर्सेज को करने वाले छात्र अक्सर कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के साथ-साथ प्रतिष्ठित ‘बिग फोर’ (Big Four) कंसल्टिंग फर्म्स के साथ भी काम कर रहे हैं।
पारुल यूनिवर्सिटी के फॉरेंसिक साइंस विभाग के प्रमुख डॉ. अमित चौहान के अनुसार, उनका संस्थान बीएससी और एमएससी प्रोग्राम्स के तहत भी फॉरेंसिक अकाउंटिंग, फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन और साइबर सुरक्षा के कोर्स ऑफर कर रहा है। उनका मानना है कि फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन का भविष्य इंसान बनाम मशीन नहीं है। यह असल में गड़बड़ियों का पता लगाने के लिए कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस और मानवीय फॉरेंसिक विशेषज्ञता का एक बेहतरीन तालमेल है।
पुलिस अधिकारियों ने भी अपराध के पैटर्न में आए इस बड़े बदलाव को महसूस किया है। जहां पिछले साल ‘डिजिटल अरेस्ट’ की घटनाएं काफी चर्चा में थीं, वहीं उससे एक साल पहले राज्य में निवेश और पहचान की चोरी से जुड़े फ्रॉड के कई मामले सामने आए थे। अपराधी भले ही अपराध करने के लिए एआई (AI) का इस्तेमाल कर रहे हों, लेकिन अब जांच एजेंसियां भी उन्हें रोकने और मामले सुलझाने के लिए इन्हीं तकनीकों का सहारा ले रही हैं।
राज्य में कुछ एमबीए (फाइनेंस) प्रोग्राम्स ने फॉरेंसिक अकाउंटिंग को एक वैकल्पिक विषय के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है, लेकिन पूरी तरह से इसके डिग्री कोर्स अभी भी सीमित हैं। हालांकि, यह विषय अब पारंपरिक प्रोफेशनल कोर्सेज का भी अहम हिस्सा बन रहा है।
साल 2023-24 में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे सीए अनिकेत तलाटी बताते हैं कि सीए फाइनल के सिलेबस में फॉरेंसिक ऑडिट को शामिल किया गया है। सीए तलाटी के अनुसार, सीए फाइनल कोर्स के पेपर 3 में फॉरेंसिक ऑडिट कवर किया गया है। छात्रों से यह उम्मीद की जाती है कि वे वित्तीय अपराधों के विभिन्न तरीकों और उनकी जांच प्रक्रिया को गहराई से समझें।
इसका मुख्य उद्देश्य वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करना और सबूत के तौर पर व्यवस्थित डेटा इकट्ठा करना है। तकनीक के इस्तेमाल से अपराधों के जटिल होने के कारण आज के समय में यह एक बड़ी जरूरत बन गया है।
इस फील्ड में करियर बनाने वालों में कई तरह के पेशेवर शामिल हैं। प्रोफेसर बारोट बताते हैं कि उनके पास सीए की योग्यता वाले कई छात्र हैं, जबकि अब यह बीबीए (BBA) और बीकॉम (BCom) स्नातकों के लिए भी एक शानदार करियर विकल्प बनता जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि इन कोर्सेज को पूरा करने वाले स्नातक पूरी तरह से एआई-सक्षम माहौल में काम करने के लिए तैयार होंगे। ये पेशेवर डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खाता डेटा और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट सहित भारी मात्रा में डेटा को खंगालने और कई खातों से जुड़े जटिल मामलों को सुलझाने में पूरी तरह से माहिर होंगे।
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