संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने पहली बार सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 में अयोग्य आवेदनों को छांटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सफल इस्तेमाल किया है। इस ऐतिहासिक और कड़े कदम के तहत प्रारंभिक चरण में ही 569 फॉर्म खारिज कर दिए गए। इनमें मुख्य रूप से वे आवेदन शामिल थे जो एक ही व्यक्ति द्वारा कई बार भरे गए थे या फिर उन उम्मीदवारों के थे जिन्होंने अपने प्रयासों की अधिकतम सीमा पार कर ली थी।
यह सख्त कार्रवाई वर्ष 2024 में पूर्व आईएएस ट्रेनी पूजा खेडकर की सेवा से बर्खास्तगी के ठीक दो साल बाद देखने को मिली है। खेडकर ने अपना और माता-पिता का नाम बदलकर नियमों को दरकिनार करते हुए सिविल सेवा परीक्षा-2022 दी थी, जबकि वह अपने अधिकतम प्रयासों की सीमा काफी पहले पार कर चुकी थीं। इसके बाद आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी।
पिछले साल तक इस तरह के फर्जीवाड़े या नियमों के उल्लंघन की जांच प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पास करने के बाद इंटरव्यू के स्तर पर होती थी। आयोग के तय नियमों के अनुसार, सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 32 वर्ष की आयु तक कुल छह प्रयास मिलते हैं। वहीं, ओबीसी वर्ग को 35 साल की उम्र तक नौ मौके और एससी-एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को 37 वर्ष की आयु तक असीमित बार परीक्षा में बैठने की विशेष छूट दी गई है।
इस बार 24 मई को आयोजित हुई प्रारंभिक परीक्षा के लिए कुल 8.18 लाख उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 5.49 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। आयोग के आधिकारिक आंकड़ों पर गौर करें तो 2025 में आवेदन करने वालों की संख्या 9.5 लाख थी, जिसमें इस वर्ष एक बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
जानकारों और आयोग से जुड़े सूत्रों का मानना है कि आवेदकों की संख्या में इस कमी की एक प्रमुख वजह इस साल लागू किए गए नए पारदर्शी नियम हो सकते हैं। इनमें आधार-आधारित प्रमाणीकरण और एआई तकनीक के जरिए एक से ज्यादा आवेदनों (डुप्लीकेशन) की सटीक पहचान करना शामिल है।
पिछले साल आयोग ने परीक्षार्थियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए एक नया पोर्टल लॉन्च किया था, जिसमें 2026 की परीक्षा के लिए आधार प्रमाणीकरण का विकल्प मौजूद था। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, करीब 94 फीसदी आवेदकों ने स्वेच्छा से यह विकल्प चुना, जिससे यह तय हो गया कि वे सभी अद्वितीय और असली उम्मीदवार हैं।
बाकी बचे हुए लगभग 49,000 आवेदनों की सूक्ष्म जांच एआई के माध्यम से की गई। इस प्रक्रिया में तकनीक ने नाम, माता-पिता का नाम, जन्म तिथि और तस्वीरों का मिलान करके डुप्लीकेट फॉर्म्स की पहचान की। इसके बाद आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया कि क्या किसी उम्मीदवार ने अपने अनुमत प्रयासों की सीमा को पार कर लिया है या अपनी श्रेणी की अधिकतम उम्र सीमा लांघ दी है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि एआई की मदद से पिछले 15 सालों के डेटाबेस को खंगाल कर यह गहन जांच पूरी की गई। सिविल सेवा परीक्षा के मामले में ऐसे 569 उम्मीदवार पकड़ में आए, जिनके आवेदन तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिए गए। इसी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल करते हुए 24 मई को होने वाली भारतीय वन सेवा (इंडियन फॉरेस्ट सर्विस) परीक्षा के लिए भी 69 अयोग्य उम्मीदवारों को बाहर का रास्ता दिखाया गया।
इस अहम व्यवस्थागत बदलाव पर यूपीएससी के अध्यक्ष अजय कुमार ने जोर देते हुए कहा कि तकनीक को हमेशा निष्पक्षता सुनिश्चित करने के काम आना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रारंभिक परीक्षा के आवेदन स्तर पर ही फर्जी या एक से अधिक आवेदनों को हटाने का विशेष अभियान चलाया गया ताकि हर असली उम्मीदवार की सही पहचान हो सके।
उन्होंने आगे कहा कि यह पूरी प्रक्रिया आयोग के मौजूदा डेटाबेस के सुरक्षित मिलान पर आधारित है और इसमें उम्मीदवारों की निजी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। यूपीएससी का मुख्य लक्ष्य हर एक उम्मीदवार के लिए समान अवसर वाला एक पारदर्शी मंच तैयार करना है, और तकनीक इस लक्ष्य को हासिल करने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रही है।
अधिकारियों ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि उम्मीदवारों द्वारा पहले के प्रयासों से अपनी सामाजिक श्रेणी बदलने की जांच भी इस बार प्रारंभिक स्तर पर ही पूरी कर ली गई। पहले यह काम भी इंटरव्यू के दौरान होता था। एआई का इस्तेमाल कर यह बारीकी से देखा गया कि क्या किसी आवेदक ने सामान्य से ईडब्ल्यूएस या एससी से ओबीसी जैसी अपनी पिछली श्रेणी में कोई बदलाव किया है।
इस जांच में ऐसे कुल 43,497 उम्मीदवार सामने आए जिन्होंने अपनी श्रेणी बदली थी। इसके बाद यूपीएससी ने इन सभी को ईमेल भेजकर इस बदलाव का सत्यापन किया। सूत्रों के अनुसार, कई अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्हें समय पर प्रासंगिक प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया था, इसलिए उन्होंने पहले सामान्य श्रेणी में आवेदन किया था।
इस पूरी क्रॉस-चेकिंग के परिणामस्वरूप कुल 569 में से 133 आवेदन इसलिए तत्काल रद्द कर दिए गए क्योंकि उन्होंने अपनी नई श्रेणियों के लिए भी अनुमत प्रयासों की संख्या पार कर ली थी।
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